Bhutiya Kahani hindi mein | Darawni Kahaniya | Train ki Bhutiya Kahani | भूत और पहलवान ~ thekahaniyahindi

Bhutiya Kahani hindi mein | Darawni Kahaniya | भूत और पहलवान | Train ki Bhutiya Kahani

Bhutiya Kahani hindi mein | Train ki Bhutiya Kahani | भूत और पहलवान :- हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? आपका फिर हाजिर हैं, आज की इस स्टोरी में आपको एक नहीं जबकि 2 New Bhutiya Kahani पढ़ने को मिलेगी के साथ। दोस्तों अगर आप Google पर अगर Bhutiya Kahani | Train ki Bhutiya Kahani | भूत और पहलवान सर्च कर रहे हैं तो आप बिलकुल सही जगह आये हो।

Asli Bhutiya Kahani की कहानीयो Train ki Bhutiya Kahani और भूत और पहलवान में हम आपको ऐसे रहस्य की सैर कराने जा रहे हैं, जिसमें प्रवेश करने के बाद लोग थर-थर कांप ने लगते हैं। ऐसा माहौल जिसमें डर लगना तो पक्‍का है, क्‍योंकि यह भूतो की खतरनाक कहानीया होने वाली हैं | तो इसे पूरा जरूर पढ़े |

New Bhutiya Kahani | भूत और पहलवान 


Asli New Bhutiya Kahani hindi mein | Darawni Kahaniya | भाग्य वाले का भूत हल जोतता हैं  ~ thekahaniyahindi
Asli New Bhutiya Kahani hindi mein | Darawni Kahaniya | भाग्य वाले का भूत हल जोतता हैं  ~ thekahaniyahindi

Bhutiya Kahani hindi mein | Darawni Kahaniya | भूत और पहलवान -: गांव से दूर एक मोनू पहलवान रहता था उसके पास पचास से अधिक भी थी वह पुरे दिन भेसो की देख रेख करता और उससे प्राप्त दूध को पिया करता था उस पहलवान की यही दिन चर्या थी वह दूध पि पि कर इतना  बलशाली हो गया था। 
की उसका कोई सामना नहीं कर सकता था वह अपने साथ पचास किलो का लोहे का डंडा रखता था आवश्यकता पड़ने पर उसी डंडे से युद्ध किया करता था कुछ समय से वह रस्ते में आये गए लोगो से पूछता था की मेरी शादी कहा होगी | 

मेरी शादी कहा होगी 
इस पर लोग उसको कोई जवाब नहीं दे पाते थे और वह लोगो की पिटाई कर देता था | 
एक बार की बात हैं एक ब्राह्मण और एक नाइ दूर कही शादी की रस्म करने उस रस्ते से जा रहे थे रस्ते में मोनू पहलवान मिल गया दुसरो की तरह उसने ब्रामण और नाइ से सवाल किया मेरी शादी कहा होगी दोनों डर गए थे वह जानते थे।  
की जवाब नहीं देने पर यह पहलवान उनकी पिटाई करेगा इस पर नै ने एक युक्ति लगाई और दूर ताड़ का पेड़ दिखा कर कहा तुम्हारी शादी वह होगी मोनू पहलवान बहुत खुश हुआ उसने अपनी पचास भेसे उन दोनों को दे दी | 

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और कहा यह सब तुम लेते जाओ अब ये मेरे किसी काम की नहीं | 
अब में चला ससुराल खातिदारी करवाने | 
मोहन पहलवान उस पेड़ को लक्ष्य बनाकर वह पहुंच गया वह एक झोपड़ी थी उसके अंदर एक महिला और एक बच्चा था | 
वह जाकर पहलवान ने हाजिरी लगवाई उस महिला को समझ नहीं आया की यह कोण हैं किन्तु सोचा वह मेरे पति के जानकार होंगे इसीलिए उसको मेहमान समझ कर मेहमान के कमरे में बैठा दिया और लोटा बाल्टी हाथ पैर धोने के लिए दे दिए। 
थोड़ी देर में महिला का पति वह आता हैं तो उस पहलवान को देख कर अचरज में पद जाता हैं की यह कोण हैं वह अपनी से पूछता हैं तो वह कहती हैं पता नहीं यह कोण हैं में तो सोच रही थी की यह तुम्हारा कोई परिचित होगा पर यह तो तुम्हारी तरह बद्तमीज हैं मुझे भी थप्पड़ मार दिया इसने | 
इतना सुनते ही उसका पति क्रोधित होकर उस पहलवान के पास गया और कहने लगा की तूने मेरी पत्नी को कैसे मारा ? और झगड़ा शुरू कर दिया | 

मोनू पहलवान अपनी बेइज़्ज़ती बर्दाश्त नहीं कर पाया और लोहे का डंडा उस औरत के पति के दे मारा और वह आदमी वही मर गया | वो औरत कहने लगी की अब मेरे पति ही एक सहारा थे अब वह भी मर गए अब तुम्हारे साथ ही ज़िंदगी निर्वाह होगी | 
दोनों घर में रहने लगे पांच सात दिन बीते होंगे घर में जमा राशन पानी ख़त्म होंगे लगा | 
तब उस महिला ने बोलै की कुछ कमाई भी करोगे या ऐसे ही भूके मरेंगे ? बिना कमाई के जीवन कैसे चलेगा ? मगर मोनू पहलवान भेसो का दूध पिने के अल्वा कोई काम नहीं जनता था | 
पहलवान उस महिला से पूछा कमाई क्या होती हैं ?
महिला ने उसे बताया की राजा के पास जाकर कुछ खेती के जमीन मांग लो | 
जिस पर खेती कर के अनाज उपजाया जाये | 
पहलवान अपना डंडा लेकर राज महल के तरफ चल पड़ा | 
राज महल से कुछ दूर रहा होगा की पहलवान को आते देख लोग डर के मारे कांपने लगे वह यहाँ आ रहा एक आधे को वह मार डालेगा राजा ने अपने मुंशी को कहा उससे यहाँ आने का कारण पता करो मुंशी मोनू पहलवान के पास गया। 
और उसके यहाँ आने का कारन पूछा इस पर मोनू पहलवान ने बताया की वह खेती के लिए राजा से जमीन मांगने आया हैं ,मुंशी ने कहा तुम यही ठहरो में राजा को बता कर आता हु | 

मुंशी ने राजा के पास जाकर उसके आने का कारन बताया | राजा मुंशी से बोलै की उसको जितनी वो मांगे जहा मांगे वह जमीन दे दो | 

मुंशी तुरंत मोहन पहलवान के पास जाता हैं और चालाकी से शमशान के पास पड़ी बंजर जमीन दे देता हैं पहलवान जुताई करने से पहले सोचता हैं की यह जमीन के बिच में खड़ा पीपल का पेड़ जिसके कारन फसल की पैदा काम होगी। 
इसीलिए पहले इसे काट दे ता हु उसने गुस्से में पेड़ पर अपना लोहे का डंडा मारा तो पीपल के पेड़ से सो भूत उतर आये और पहलवान से लड़ाई करने लगे | 


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Bhutiya Darawni Kahaniya
मोनू पहलवान भी भूतो का सामना बहादुरी से कर रहा था | 
किसी भूत का हाथ टूट गया किसी का सर फुट गया सब भूत लाइन में खड़े हो गए और पहलवान से माफ़ी मांगने लगे उन्होंने पीपल के पेड़ को हटाने का कारन पूछा तो पहलवान ने कहा यह मेरे जमीन के बीच में इसीलिए यहाँ से हटाऊँगा इसको | 



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Asli Bhutiya Kahani
भूतो ने कहा की हम इस खेत से होने वाली पैदावार को तुम्हरे घर में पंहुचा देंगे पर यह पेड़ मत काटो यह हमारा घर हैं और हम यहाँ कर सालो से रह रहे हैं मोनू पहलवान बलशाली था। 

और बलशाली दया कर देते हैं इसीलिए उसने हामी भर दी और घर चला गया अब भूतो ने पहलवान के घर एक साल राशन भर दिया और मोनू ऐश मौज से जिंदगी काटने लगा | 


भूतो को यह सोडा महंगा पड़ा वो काम कर कर के दुबले पतले हो गए थे | 
एक दिन भूतो के गुरु जी वह पहुंचे और उन सब की हालत देख कर उनसे इसका कारन पूछा तब भूतो ने अपनी आप बीती गुरु जी को सुना दी | 

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New Bhutiya kahani
गुरु जी बदला लेने के लिए बिल्ली का वेश बना कर  पहलवान के  घर जाने लगे  पहलवान के घर का दूध पि जाते हैं।  
पहलवान ने परेशान होकर बिल्ली को सबक सीखने के लिए दरवाजे की आड़ में डंडा लेकर खड़ा हो गया पर बिल्ली की वेश में आये गुरु जी ने बहार से देख लिया की पहलवान उस पर वॉर करने के लिए खड़ा हैं | 

इधर पहलवान बिल्ली   का इंतजार कर रहा था की बिल्ली कब आये और उस पर हमला करे मगर बिल्ली अंदर नहीं आ रही थी।  

मोनू धीरे धीरे पीछे हट गया और चूल्हे की ओट में छिप गया बिल्ली अंदर आई उसने मोनू पर ही हमले का प्रयास किया पर मोनू सतर्क था उसने एक डंडा पीठ में लगा दिया | 


भूतो के गुरु  के पसीने छूट गए उसने अपने रूप में आकर पहलवान से माफ़ी माँगा शुरू कर दी तो मोनू  पहलवान ने कहा छोड़ने से बदले क्या सजा दी जाये तो गुरु जी ने कहा की अब से पहले से दुगना राशन तुम्हारे घर पंहुचा जायेगा | गुरु जी  ने  सारि बात अपने चेलो को बताई तो सब सर पीट कर रह गए की पहले से दुबले थे और अब नई आफत आ गई | 

Train ki Bhutiya Kahani | रेल में सफ़र कर रहे व्यक्ति के साथ घटी एक ड़रावनी घटना


राजवीर नामक चालीस वर्षीय व्यक्ति सात माह के बाद अपने भरे-पूरे परिवार में लौट रहा था |
राजवीर शहर से बाहर नौकरी करता था, सात महीने का अपना पूरा पैसा इकट्ठा करके वह अपने घर लौट रहा था |

उसके परिवार में उसकी पत्नी थी और दो बच्चे |
राजवीर रेलगाड़ी से अपने घर का सफर तय कर रहा था |
रात काफी हो चुकी थी ट्रेन में सवार सभी लोग अपनी अपनी बर्थ पर सो रहे थे |
मगर राजवीर की आंखों में नाम-मात्र को नींद नहीं थी, इसका सबसे बड़ा कारण उसे घर जाने की खुशी थी | घर जाने की खुशी में राजवीर को नींद नहीं आ रही थी |
राजवीर के अलावा एक व्यक्ति ऐसा और भी था, जो सोया नहीं था |
उसकी बर्थ के सामने वाली बर्थ पर ही वह व्यक्ति बैठा था |
अपने सामने चुपचाप बैठे व्यक्ति को राजवीर ने देखा तो जाना कि वह ड्रैकुला की कहानी पढ़ रहा था।
राजवीर को लगा कि उसके सामने जो व्यक्ति बैठा है, वह किताब पढ़ने के माध्यम से अपना वक्त बिता रहा है शायद उसे भी नींद नहीं आ रही है।
राजवीर को लगा कि वह क्यों न अपने सामने बैठे व्यक्ति से बातचीत करने में अपना समय गुजारे, इसी इरादे के साथ राजवीर ने उसे पुकारा- “भाई साहब”
किताब पढ़ रहे व्यक्ति ने उसकी आवाज को अनसुना-सा करके उस पर कोई ध्यान नहीं दिया |
“भाई साहब”
दूसरी आवाज पर उसने किताब नीचे करके राजवीर को सपाट दृष्टि से देखा उसके चेहरे पर भी सपाट भाव ही थे |
इस बार राजवीर तनिक संकोच के साथ बोला-
“मैंने आपको डिस्टर्ब तो नहीं किया |”
“नहीं” सामने बैठा व्यक्ति सपाट स्वर में बोला |
राजवीर मुस्कुराकर उससे बातों का सिलसिला जारी रखते हुए बोला- “आपका नाम क्या है |”
“सूर्य प्रताप” वह बोला |
“ओह” राजवीर ने हलक से सांस छोड़ते हुए कहा “क्या आप भी अपने घर जा रहे हैं|”  
“नहीं” सूर्य प्रताप ने पूर्ववत स्वर में कहा |
“तो फिर आप अपने घर से कहीं और जा रहे हैं” राजवीर ने मुस्कुराते हुए सामान्य स्वर में कहा |
प्रताप ने उसे इस नजर से देखा मानो वह कुछ ना कहना चाहता हो |
राजवीर चेहरे से ऐसा प्रकट करने लगा मानो बराबर संकोच कर रहा हो | फिर बोला-
“मैं आज सात महीने बाद अपने घर वापस लौट रहा हूं, अपने परिवार से मिलने की खुशी में मुझे नींद नहीं आ रही है इसलिए मैंने सोचा थोड़ा आपसे बात ही कर लूं |”
प्रताप कुछ ना बोला वह उसकी बात पर सिर को इस तरह जुम्बिश देकर रह गया, मानो उसकी बात पर सहमति जता रहा हो |
प्रताप के हाव भाव से साफ जाहिर था कि वह बात करने के मूड में बिल्कुल नहीं था | वह निरंतर जता रहा था कि जैसे उसे इस समय बात करना बिल्कुल अच्छा न लग रहा हो |
मगर आज तो जैसे राजवीर चुप रहने के मूड में बिल्कुल नहीं था, वह बातों को बढ़ावा देते हुए बोला-
“भाई साहब, क्या आप भूत-प्रेतों पर विश्वास करते हैं |”
“हां” प्रताप अपने छोटे से उत्तर में बात को पूरा किया |
“मगर कैसे” राजवीर बोला -“क्या आपने कभी किसी भूत या प्रेत को अपनी आंखों से देखा है |”
उसके प्रश्न पर प्रताप ने चंद लम्हो तक उसे ध्यान पूर्वक इस तरह देखा मानो उससे बहुत कुछ कहना चाहता हो |
मगर ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ |
कुछ कहने के स्थान पर प्रताप ने किताब अपने चेहरे के सामने की और उसे पढ़ने लगा |
राजवीर ऐसा देख उलझ गया उसकी समझ में नहीं आया कि प्रताप ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं देकर अपना चेहरा किताब में क्यों छुपा लिया ?
इस बार राजवीर ने भरपूर संकोच भरे स्वर में कहा-
“आपने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया, भाई साहब”
जवाब के रूप में प्रताप ने अपने चेहरे के आगे लगी किताब हटाई तो उसका बहुत ही भयंकर चेहरा राजवीर के सामने आ गया |
प्रताप का चेहरा इतना डरावना हो चला था कि यदि कोई मानव उस चेहरे को देखकर अपने प्राण भी गवा बैठता तो हैरानी की बात नहीं थी |  
उसका डरावना चेहरा देखते ही राजवीर की आंखों में मानो दुनिया भर का खौफ सिमट आया था | उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी थी |
राजवीर की दोनों हथेलियां बर्थ से इस तरह सट गई थी, मानो उनके सहारे से वह उठकर खड़ा होना चाहता हो, उसकी पीठ पिछले भाग से सट गई थी |
हद यह थी उसके खौफजदा रह जाने की कि वह सांस लेने में भी डर रहा था या फिर यह कहा जाए कि सांसे खुद ही बाहर आते हुए भयभीत थी |
यहां तक कि उसकी आवाज भी नहीं निकल पा रही थी |
राजवीर जान गया था कि उसके सामने मौजूद प्रताप कोई मनुष्य नहीं, बल्कि एक भूत है |
राजवीर बेबस रहकर अपने स्थान पर शिवाय बैठे रहने के कुछ ना कर सका |
उसके सामने बैठा डरावना चेहरे व लंबे-लंबे दांत वाला भूत ठहाके लगाकर बोला-
“अब तुम्हें विश्वास हो चला होगा कि आज के समय में भी भूत-प्रेत जैसी चीजें मौजूद है |”
“क्या तुम सचमुच भूत हो” राजवीर ने भय से परिपूर्ण स्वर में पूछा |
“अब भी तुझे यकीन नहीं आया मूर्ख, कोई बात नहीं मैं जब तेरा खून पिऊंगा, तब तुझे यकीन आ जाएगा |”
“नहीं-नहीं मुझे मत मारो, मेरे दो बच्चे और मेरी पत्नी घर पर मेरे आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं | अगर मैं मर गया तो उनका सहारा छिन जाएगा, मुझे जाने दो |”
कहते हुए राजवीर अपने स्थान से सरकने लगा |
वह भूत उसे देखकर मुस्कुराता रहा |
राजवीर भागने के चक्कर में अपने स्थान से फुर्ती के साथ उठा और दौड़ पड़ा |
उसी समय भूत ने अपने स्थान पर बैठे रहकर ही दाहिना हाथ उठाया |
उसका हाथ लंबा हो गया, वहीं बैठे रहकर उसने भाग रहे राजवीर की गर्दन पकड़ ली और उसे अपनी तरफ घसीट लिया |
राजवीर चिल्लाया- “बचाओ-बचाओ”
उसकी पुकार सुन रेल मैं सवार सभी यात्री उसके पास चले आए |
राजवीर ने देखा कि उसके पास आए सभी यात्रियों के चेहरे भी बहुत डरावने हो चले हैं, अब उसे यह समझने में ज्यादा वक्त न लगाकर ट्रेन में सवार सभी यात्री भूत हैं |
पूरी रेल गाड़ी भूतों से भरी थी |
आहिस्ता-आहिस्ता राजवीर को चारों ओर से भूतों ने घेर लिया |
इस चक्रव्यू में फसने के बाद राजवीर का हार्ट अटैक हो गया |
इसी के साथ सारे भूत राजवीर का खून पीने के साथ-साथ उसकी बोटी-बोटी तक नोच कर खा गये |
तो दोस्तों उम्मीद हैं आप लोगो को आज की कहानी Asli New Bhutiya Kahani hindi mein | Darawni Kahaniya | भाग्य वाले का भूत हल जोतता हैं आप लोगो को पसंद आई तो कमेंट करके जरूर बताये और साथ ही दोस्तों Bhutiya Kahani को FacebookTwitter पर जरूर शेयर करे। और यदि आपके पास भी कोई कहानी या सत्य घटना पर आधारित कोई कहानी है तो हमें बताए हम उसे अपनी बेवसाइट पर पब्लिश करेंगे आपके नाम के साथ।

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