भूत का भय | Bhuto ki Kahaniya

भूत का भय | Bhuto ki Sachi Kahani | Kahaniya Bhuto ki | Hindi Kahaniya

भूत का भय | Bhuto ki Sachi Kahani | Kahaniya Bhuto ki

Bhuto ki Kahaniyaराजस्थान के सरगांव नामक गांव में मोनू और उसके और भी साथी रहा करते थे मोनू बहोत बहादुर और निडर परवर्ती का था मोनू अपने दोस्तों में साहस से भरी बाते किया करता था और हार जीत वाले ही खेल खेला  करता था | पर गांव में कुछ दिनों से भूत के चर्चे चारो और हो रहे थे गांव के शमशान में कोई भूत देखे जाने की खबर फ़ैल रही थी | मोनू ने भी इस बात पर अपने दोस्तो में चर्चा शुरू कर दी |

मोनू ने बड़े साहस और निडरता के साथ बोला की भूत जैसा कुछ नहीं होता हैं | यह सब हमारा वहां होता हैं bhoot pret ki sachi kahaniyan बस और कुछ नहीं | तब उसके दोस्त उससे कहने लगे  मोनू अगर तुम्हे ऐसा लगता हैं की भूत जैसा कुछ नहीं होता हैं तो क्या तुम शमशान जा सकते हो | 

मोनू बोला क्यों नहीं में तुम्हारे किसी भूत से नहीं डरता हु | 

मोनू की अपने दोस्तों से शर्त लग गई की वह रात तय समय पर शमशान घाट में जाकर कील ठोक कर आएगा | bhoot pret ki kahani hindi और सुबह सबको दिखायेगा भी की कील कहा ठोकी थी | 

अमावस की रात तय की गई काली रात थी इतना भयंकर अँधेरा था की हाथ को हाथ नहीं दिख रहा था मोनू भी अपने दोस्तों को गांव में छोड़ कर शमशान की तरफ निकल गया | रस्ते में को चल ही रहा था sachi bhutiya kahani की उसके मन में तरह तरह के ख्याल आने लगे | लोगो की सुनी बाते उसके दिमाग में आने लगी | की किसी ने शमशान में भूत देखा किसी ने सर कटे आदमी को देखा तो किसी ने कोई चुड़ैल देखि | और भी न जाने कितने ख्याल दिमाग में आ रहे थे | 
पर अगर मोनू अब सोचने लगा की वो लोट कर गया तो सब लोग उसका मजाक बनाएंगे और हसेंगे तो उसने आगे बढ़ना ही उचित समझा और चलता गया | मोनू अब शमशान घाट के पास पहोचने ही वाला था |  पर अब उसके सामने एक तरफ कुआ तो एक तरफ खाई कि  स्तिथि पैदा  हो गई थी | एक तरफ भूत का डर था तो दूसरी तरफ जग हसाई का | 
पर मोनू निडरता के साथ शमशान में पहोच ही गया पर अब वह कील गाड़ने की बात थी | 

भूत का भय | Bhuto ki Sachi Kahani | Kahaniya Bhuto ki

वह निचे बैठ गया और धीरे धीरे कील को जमीन में ठोकना शुरू कर दिया | वह हथोड़ा लेके गया था पर वह वहा ज्यादा आवाज नहीं करना चाहता था की कोई उसकी आवाज नहीं सुन ले | उसने हथोड़े से धीरे धीरे ठोकर कर पूरी कील जमीन में ठोक दी वह लम्बी साहस लेके उठने के लिए तैयार हुआ की उसको ऐसे लगा की उसके कुर्ते को कोई पीछे खींच रहा हैं | उसके हाथ पाँव कांपने लग गए उसका कलेजा हलक से बहार ही आ गया था की वह बेहोश होकर निचे गिर पड़ा | 
अब मोनू के दोस्त जो छिप छिप कर उस पर नजर रख रहे थे मोनू को गिरते देख उसको जल्दी से उठाया और गांव में ले आये और उसके मुँह पर पानी छिड़क कर होश में लाये काफी देर बाद उसको होश आया तो उसने डरते हुए आंखे खोली तो देखा की वो गांव में हैं | तो मोनू ने बोला की मेने जमीन में कील तो गाड़ दी थी पर जब उसने उठने की कोशिश की तो कोई उसके कुर्ते को निचे से खिंच रहा था | 
जिसके कारण ही वह बहोत बुरी तरह से डर गया था तब मोनू के दोस्तों ने बताया की उसके कुर्ते को कोई भी खिंच नहीं रहा था उसने गलती से वो कील अपने कुर्ते के उप्पर ही ठोक दी थी | 
और यही वजह थी की तुम्हे लगा की कोई तुम्हारा कुरता खिंच रहा हैं | इस घटना के लिए मोनू ने अपने दोस्तों से माफ़ी मांगी | फिर उसके दोस्त उसकी बहादुरी और साहस की करने लगे और उसको शाबासी दी | 

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