चिड़िया और चिड़ा | Chidiya aur Kauwa ki Kahani

चिड़िया और चिड़ा | Tony Chidiya ki Kahani | Kauwa aur Chidiya ki Kahani | Hindi Kahaniya

चिड़िया और चिड़ा | Tony Chidiya ki Kahani | Kauwa aur Chidiya ki Kahani

Chidiya aur Kauwa ki Kahani in hindiयह कहानी हैं एक आलसी चिड़े और एक मेहनती चिड़िया की जोड़ी की | एक जंगल में बरगद का बहोत बड़ा पेड़ था उस पर एक चिड़िया और एक चिड़ा रहता था दोनों ही बड़ी मस्ती से नाचते गाते और मजे से रहते थे | चिड़िया बहोत ही सीधी और भोली थी पर चिड़ा बहोत चालाक और धूर्त किस्म का कामचोर था चिड़िया और चिड़ा रोज सुबह उठ कर दाना चुगने जाते थे | 

एक दिन की बात हैं उन दोनों को ही खाने के लिए एक दाना भी नहीं मिला था और दोनों को भूक भी लगी थी | दोनों खाने के जुगाड़ करने के लिए बहोत दूर निकल गए और दूर शहर के एक घर में जा घुसे | उस घर में एक बर्तन में चावल और दूसरे में दाल रखे थे |

chidiya kauwa ki kahani

 चावल और दाल को देख कर चिड़ा बोलै क्यों न हम आज खिचड़ी बना ले ? चिड़िया ने भी अपनी सहमति दे दी चिड़ी और चिड़े ने चोंच में दाल चावल भर लिए और अपने बरगद के पेड़ बने घर में लोट आये | वापिस आते ही उन्होंने दाल चावल की खिचड़ी बनाई | खिचड़ी बहोत स्वादिष्ट बनी थी खुशबु दूर दूर तक आ रही थी | 
चिड़ा कामचोर और चालक होने के साथ पेटू भी था | चिड़े ने सोचा की खिचड़ी आधी आधी बाँट दी तो में तो भूका ही रह जाऊंगा और मेरा पेट नहीं भरेगा | धूर्त चिड़े ने एक योजना बनाई वो चिड़िया से बोलै खिचड़ी अभी गर्म हैं अगर गर्म खिचड़ी खाएंगे तो अपना मुँह जल जायेगा जब तक खिचड़ी ठंडी होती हैं तब तक पास के तालाब में नाहा आते हैं फिर तस्सली से बैठ कर खिचड़ी खाएंगे | पर हम दोनों साथ नहाने गए तो पीछे कोई और हमारी खिचड़ी खा जायेगा | 
  क्यों न ऐसा करे की पहले में नाहा कर आ जाऊ फिर में आ जाऊ तब तुम नहाने चली जाना | यह बोलकर वह तालाब में नहाने चला गया और जल्दी नहा कर आ भी गया और चिड़िया से कहा तुम जल्दी आना तब तक में खिचड़ी का ध्यान रखता हु जैसे ही चिड़िया नहाने निकली चिड़ा खिचड़ी पर टूट पड़ा और थोड़ी देर में खिचड़ी चट कर गया | और चिड़िया के आने से पहले ही सो गया | 
कुछ देर में चिड़िया नहाकर लोट आई | चिड़िया ने देखा की चिड़ा आराम से सो रहा हैं और खिचड़ी का बर्तन खली पड़ा हैं | चिड़िया देखते ही समझ गई की यह हरकत चिड़े ने ही की हैं | चिड़िया ने गुस्से में चिड़े को जगाया | पर चिड़ा अनजान बनने की कोशिश कर रहा था जैसे उसे कुछ पता न हो | चिड़ा बोला तुम गुस्से क्यों हो और नहाने में इतनी देर लगा दी में तो इंतजार करते करते सो ही गया था | 
 पर अब तुम आ गई हो तो खिचड़ी खा लेते हैं | तो चिड़िया भड़कते हुए बोली तुम मुझे पागल बनाने की कोशिश मत करो में तुम्हे अच्छी तरह समझ गई हु तुमने तो सारी खिचड़ी पहले की ख़त्म कर दी और अब मुझे पागल बनाने की कोशिश कर रहे हो | चिड़ा सफाई पेश करने लग गया की मेने खिचड़ी नहीं खाई यह बिलकुल झूट हैं में सो रहा था और पीछे से किसी और ने खिचड़ी खा ली |
 चिड़िया बोली ठीक हैं तुम सच बोल रहे हो या झूट इसका फैसला हम तीसरे से ही करवाएंगे | थोड़ी दूर पीपल के पेड़ पर एक कोवा रहता था जो बहोत होशियार था चिड़िया ने कहा उस कौए से ही पूछते हैं की क्या सच हैं और क्या झूट हैं और दोनों कौए के पास चले गए | 
चिड़िया और चिड़ा | Tony Chidiya ki Kahani | Kauwa aur Chidiya ki Kahani

चिड़िया ने वहा  पहोच कर कौए को सारी बात बता दी कोवा चिड़िया की बात सुनकर सारा माजरा समझ गया कोवा बोला की में तुम दोनों की कच्चे धागे की परीक्षा लूंगा तुम दोनों को कच्चे धागे से पीपल के पेड़ के झूला झूलना होगा | और तुम में से जो झूठा होगा उसका धागा टूट जायेगा |
 दोनों इस परीक्षा के लिए राजी हो गए चिड़े ने चिड़िया से बोला पहले तुम झूलो में बाद में झूलूँगा चिड़िया भुकी थी तो आसानी से झूलने लगी उसके वजन से धागा नहीं टूटा अब चिड़े की बारी आई चिड़ा जैसे ही कच्चे धागे से लटका धागा टूट गया क्योकि खिचड़ी अकेले ही खा गया था जिसे वजन बढ़ गया था चिड़ा जमीन पर आ गिरा और उसके मुँह और पैर में चोट भी लगी | 
कौवे ने कहा कि हो गया फैसला – चिड़िया सच्ची और चिड़ा झूठा, सारी खिचड़ी चिड़े ने ही खाई है। चिड़े ने भी अंत में अपनी गलती मान ही ली।

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