सब्जी वाला | Majedar Hindi Kahaniyan

सब्जी वाला | Majedaar Hindi Kahaniya
सब्जी वाला | Majedaar Hindi Kahaniya

Majedar Hindi Kahaniyanएक गांव में एक सब्जी बेचने वाला रहता था | वह रोज गांव शहर में जाकर सब्जी बेचा करता था | एक दिन सब्जी बेचने वाला सब्जी बेचते बेचते गोविन्द के घर पर पहोच गया | वह खड़े एक व्यक्ति ने उसकी सब्जी की टोकरी को निचे उतर दिया | जैसे ही टोकरी को निचे रखा बहोत सारे लोग सब्जी खरीदने के लिए इकठ्ठे हो गए | 
ठीक उसी टाइम पर गोविन्द की बीवी भी सब्जी खरीदने के लिए आ गई | उसने कुछ सब्जी खरीद ली | जब सब्जी वाले ने पैसे मांगे तो गोविन्द की बीवी बोली भैया अभी तो मेरे पास पैसे नहीं हैं और मेरे पति भी घर पर नहीं हैं | पर आप घर आते वक़्त पैसे ले जाना | तब तक मेरे पति भी घर पर आ जेएंगे | 

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यह सुनते ही सब्जी वाला भड़क गया और बोला मेरे पास उधर का कोई हिसाब नहीं हैं अगर पैसे हो तो सब्जी ले लो नहीं तो सब्जी वापस दे दो | और रही बात आपके पति की तो उसको में अच्छी तरह जनता हु | वह जब भी किसी से पैसे लेता हैं कभी वापस नहीं देता हैं | यह सुनकर गोविन्द की पत्नी को बहोत बुरा लगा और उसने सब्जी वापस लोटा दी और सब्जी वाला भी वहा से चला गया | 

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शाम को गोपाल अपने घर पहोचा | उसने अपनी बीवी को घर पर मुँह लटकाये बैठे देखा | अपनी पत्नी को ऐसे देख कर उसका कारन पूछा ? पत्नी ने गुस्से में सारी बात अपने पति को बता दी | गोविन्द मुस्कुराते हुए बोलै बीएस इतनी सी बात के लिए तुम गुस्सा हो इसका फैसला तो में एक मिनिट में कर दूंगा और अपनी बीवी के कान में कुछ बोला | और कल सुबह तक का इंतजार करने के लिए बोल दिया | 
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दूसरे दिन सुबह पहले ही गोविन्द अपने घर के बहार बने चबूतरे पर बैठ गया| उसने आज सब्जी वाले से बदला लेने का मन बना रखा था इसी लिए वह काम पर भी नहीं  गया | 
वह सब्जीवाले का इंतजार कर ही रहा था की सब्जी वाला भी आ गया | वह सब्जी वाले की टोकरी उतरवाने के लिए और कोई नहीं था तो उसने गोविन्द को आवाज दी | गोविन्द ने बीमारी का बहाना करते हुए कहा की में बीमार हु इसीलिए में नहीं आ सकता हु | सब्जी वाला बोला तुम थोड़ा सहारा लगा देना तुम्हे कुछ नहीं होगा | वह सब्जी वाले की बात मानकर गोविन्द टोकरी उतरने के लिए चला गया | 
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जैसे ही गोविन्द ने टोकरी को निचे उतरने  हाथ लगाया | तो बीच में ही हाथ छोड़ कर जमीन पर छटपटाने लगा | सब्जी सरि सब्जी निचे गिरा दी | बेचारे सब्जी वाले को इस नाटक के बारे में कुछ नहीं पता था | तब गोविन्द के कहे अनुसार उसकी पत्नी हाथ में एक लकड़ी का डंडा लेकर आई और सब्जी वाले को मरना शुरू कर दिया | 
और लोगो को सुना सुना कर कहने लगी मेरे बीमार पति को मार दिया | सब्जी वाले को अपनी पिटाई की वजह से कुछ समझने का समय नहीं मिल रहा था आखिर वह सब्जी को वही छोड़कर भाग निकला | उसने सोचा जान बची तो लाखो पाए | 
उसके जाने के बाद दोनों मिया बीवी ने उसकी सब्जी समेत कर घर ले आ ये उसके बाद जब भी सब्जी वाला आता उसकी पत्नी से कुछ भी नहीं कहता | 

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