बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindi

बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindi |  गुरुवार, कथा, आरती, विधि, उद्यापन

बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindi
बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindi

हेलो दोस्तों आप सब का स्वागत हैं आपके अपने ब्लॉग   thekahaniyahindi  पर | आज की इस कहानी में हम आपके लिए कुछ खास जानकारी लेके आये जो उम्मीद हैं आपको बहोत पसंद आएगी | 
बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ  का महत्व | बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindi
बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindiबृहस्पति देव का व्रत साल के किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष में अनुराधा नक्षत्र और बृस्पतिवार मतलब गुरुवार अंग्रेजी सप्ताह के Thursday के दिन शुरुवात करना चाहिए | 
कथा और पूजा करते समय वचन मन कर्म सभी से शुद्ध होकर अपनी सभी मनोकामनाओ की पूर्ति हेतु बृहस्पति भगवन से प्रार्थना करनी चाहिए | इस व्रत में चन्दन धान कपड़ो और फूलो का विशेष महत्व होता हैं | 

गुरुवार के कितने व्रत करना चाहिए

हिन्दू धर्म के अनुसार बृहस्पतिवार को नियमित रूप से 16  व्रत करने चाहिए | इससे गुरु गृह से पैदा होने वाला अनिष्ट नष्ट होता हैं | 16  व्रत पुरे होने के बाद व्रत का विधि के अनुसार उद्यापन किया जाता हैं | 

बृहस्पतिवार के व्रत की विधि | बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी

बृहस्पतिवार के व्रत की विधि - बृहस्पतिवार के व्रत की विधि के लिए आपको चना दाल, गुड़, हल्दी, कुछ केले जैसे कई सामग्रियों की आवश्यकता होगी 
एक अप्पाला और भगवान विष्णु की एक तस्वीर बना ले और वहाँ एक केले का पेड़ हो तो वह पूजा करे,  व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करे और अन्य काम पुरे करे, भगवान के सामने बैठ कर चावल और पीले फूल चढ़ाकर भगवान का शुद्धिकरण करे, 16 गुरुवार  के व्रत का संकल्प करना और उन्हें छोटे पीले कपड़े देना अच्छा होता है।
और यदि वे केले के पेड़ हैं यदि आप अपने सामने पूजा कर रहे हैं, तो पीले रंग का एक छोटा कपड़ा भी भेंट करें। लोगों के घर छोटे होते हैं, इसलिए आमतौर पर उनके घरों में केले का पेड़ नहीं होता है, इसलिए आप अपने मंदिर में पूजा कर सकते हैं। 
एक गमले में पानी डालें और उसमें थोड़ी हल्दी डालकर भगवान विष्णु या केले के पेड़ की जड़ को स्नान कराएं। अब इसमें गुड़ और चने की दाल डालें और अगर आप केले के पेड़ की पूजा कर रहे हैं तो वहां चढ़ाएं।
भगवान को हल्दी या चंदन का तिलक करें, पीले चावल चढ़ाएं, घी का दीपक जलाएं, कथा पढ़ें। कथा के बाद, ऊपरी पर निचोड़ें, गाय की ऊपरी पीठ को गर्म करें और उसमें घी डालें और जैसे ही आग जलाई जाए, नमन मंत्र के साथ 5 या  9 गुरु हवन सामग्री के साथ गुड़ और चने का त्याग करना करे  अग्नि के बाद आरती करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
पूजा पूरी होने के बाद अपने घर के पास केले के पेड़ या गमले में लगे पौधे  को जल अर्पित करें।

इस दिन आप केले के पेड़ की पूजा विशेष  हैं, इसलिए गलती से भी केले न खाएं। आप इसे केवल पूजा में चढ़ा सकते हैं और प्रसाद में वितरित कर सकते हैं। अगर कोई गाय मिल जाए तो उसे बेसन और गुड़ खिलाएं।
किन किन बातो का ध्यान रखे 
  • बालों में तेल नहीं लगाना चाहिए।
  • बालों को धोना नहीं चाहिए।
  • बाल कटवाने नहीं चाहिए।
  • घर में पोचा नोटेजेना चाहिए।
  • कपडे धोबी को नहीं देना चाहिए।
  • नमक और खट्टा नहीं खाना चाहिए।
  • पीला या मीठा खा सकते हैं।
  • चने की दाल की पूड़ी या पराठा एक समय खा सकते हैं।

बृहस्पतिवार के व्रत की कथा | बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी पीडीएफ Download ~ thekahaniyahindi


बृहस्पतिवार के व्रत की कथा - एक समय की बात है, राजा शिकार खेलने के लिए वन चले गए थे। घर पर रानी और दासी थी। उसी समय गुरु बृहस्पतिदेव साधु का रूप धारण कर राजा के दरवाजे पर भिक्षा मांगने आए।
 साधु ने जब रानी से भिक्षा मांगी तो उसने कहा, हे साधु महाराज, मैं इस दान और पुण्य से तंग आ गया हूं। आप ऐसा कोई उपाय नहीं बता रहे हैं, जिससे सारा धन नष्ट हो जाए और मैं आराम से रह सकूं।
बृहस्पतिदेव ने कहा, हे देवी, आप बड़ी विचित्र हो, संतान और धन से कोई दुखी होती है। यदि अधिक धन है तो यह शुभ कार्यों में लगाओ, कुंवारी कन्याओं का विवाह कराओ, विद्यालय और बाग-बगीचे का निर्माण कराओ, जिससे तुम्हारे दोनों लोक सुधरें। 
लेकिन साधु की इन बातों से रानी को खुशी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसे धन की आवश्यकता नहीं है, जिसे मैं दान दूं और जिसे संभालने में मेरा सारा समय नष्ट हो जाए।

तब साधु ने कहा- अगर तुम्हारी ऐसी इच्छा है तो मैं तुम्हें तुमसे जोड़ता हूं तुम वैसा ही करना। गुरुवार के दिन आप घर को गोबर से लीपना, अपने केशों को पीली मिटटी से धोना, केशों को धोते समय स्नान करना, राजा से हजामत बनाने को कहना, भोजन में मांस मदिरा खाना, कपड़ा धोबी के यहाँ धौल डालना। इस प्रकार सात बृहस्पतिवार करने से आपका सारा धन नष्ट हो जाएगा। इतना कहकर साधु रुपी बृहस्पतिदेव अंतर्ध्यान हो गए।

साधु के अनुसार कही बातों को पूरा करते हुए रानी को केवल तीन बृहस्पतिवार ही बीते थे कि उसकी सारी धन-संपत्ति नष्ट हो गई। भोजन के लिए राजा का परिवार तरसने लगा। तब एक दिन राजा ने रानी से बोला कि हे रानी, ​​तुम यहीं रहो, मैं दूसरे देश को जाता हूं, क्योंकि यहां पर सभी लोग जानते हैं। 
इसलिए मैं कोई छोटा कार्य नहीं कर सकता। ऐसा कहकर राजा ओनेश चला गया। वहाँ वह जंगल से लकड़ी काटकर लाता है और शहर में बिक्री करता है। इस तरह उन्होंने अपना जीवन व्यतीत करने का प्रयास किया। इधर, राजा के परदेश जाते ही रानी और दासी दुखी रहने लगे।

एक बार जब रानी और दासी को सात दिन तक बिना भोजन के रहना पड़ा, तो रानी ने अपनी दासी से कहा- हे दासी, पास ही के नगर में मेरी बहन रहती है। वह बड़ा धनवान है। उसके पास होने और कुछ ले आ, ताकि थोड़ा-बहुत गुजर-बसर हो जाए। दासी रानी की बहन के पास गए।

उस दिन गुरुवार था और रानी की बहन उस समय बृहस्पतिवार व्रत की कथा सुन रही थी। दासी ने रानी की बहन को अपनी रानी का संदेश दिया, लेकिन रानी की बड़ी बहन ने कोई उत्तर नहीं दिया। जब दासी को रानी की बहन से कोई उत्तर नहीं मिला तो वह बहुत दुखी हुई और उसे गुस्सा भी आया।
दासी ने वापस आकर रानी को सारी बात बता दी। सुनकर रानी ने अपनी किस्मत को कोसा। उधर, रानी की बहन ने सोचा था कि मेरी बहन की दासी आई थी, लेकिन मैं उससे बोली नहीं, क्योंकि वह बहुत दुखी हुई होगी।
कथा सुनकर और पूजन समाप्त करके वह अपनी बहन के घर आई और कहने लगी- हे बहन, मैं बृहस्पतिवार का व्रत कर रही थी। तुम्हारी दासी मेरे घर आई थी लेकिन जब तक कथा होती है, तब तक न तो उठते हैं और न ही बोलते हैं, इसलिए मैं बोली नहीं। कहो दासी क्यों गई थी।

रानी बोली- बहन, तुम क्या छुपाऊं, हमारे घर में खाने तक को अनाज नहीं था। ऐसा कहते-कहते रानी की आंखें भर आई। उसने दासी को पिछले सात दिनों से भूखे रहने तक की बात अपनी बहन को विस्तार से बता दी। रानी की बहन बोली- देखो बहन, भगवान बृहस्पतिदेव सबकी मनोकामना को पूर्ण करते हैं। देखो, शायद तुम्हारे घर में अनाज रखा हो।

पहले तो रानी को विश्वास नहीं हुआ पर बहन के अनुरोध करने पर उसने अपनी दासी को अंदर भेजा तो उसे सचमुच अनाज से भरा एक घड़ा मिल गया। यह देखकर दासी को बड़ी हैरानी हुई।
दासी रानी से कहने लगी- हे रानी, ​​जब हमको भोजन नहीं मिलता तो हम व्रत ही करते हैं, इसलिए क्यों न इनसे व्रत और कथा की विधि पूछ ली जाए, ताकि हम भी व्रत कर सकें। तब रानी ने अपनी बहन से बृहस्पतिवार व्रत के बारे में पूछा।

उसकी बहन ने बताया, बृहस्पतिवार के व्रत में चने की दाल और मुनक्का से विष्णु भगवान का प्रतिबंध की जड़ में पूजन करें और दीपक जलाएं, व्रत कथा सुनें और पीला भोजन ही करें। इससे बृहस्पतिदेव प्रसन्न होते हैं। व्रत और पूजन विधि बताकर रानी की बहन अपने घर को लौट गई।

सात दिन के बाद जब गुरुवार आया, तो रानी और दासी ने व्रत रखा। तलाल में जाना चना और गुड़ के बारे में आईं। फिर से बैन की जड़ और विष्णु भगवान का पूजन किया। अब पीला भोजन कहां से आया इस बात को लेकर दोनों बहुत दुखी थे। 
चूंकि वे व्रत रखते थे इसलिए बृहस्पतिदेव प्रसन्न थे। इसलिए वे एक साधारण व्यक्ति का रूप धारण कर दो थालों में सुंदर पीला भोजन दासी को दे गए। भोजन पाकर दासी प्रसन्न हुआ और फिर रानी के साथ मिलकर भोजन ग्रहण किया।

उसके बाद वे सभी गुरुवार को व्रत और पूजन करने लगे। बृहस्पति भगवान की कृपा से उनके पास फिर से धन-संपत्ति आ गई, बटानी फिर से पहले की तरह आलस्य करने लगी। तब दासी बोली- देखो रानी, ​​आप पहले भी इस प्रकार आलस्य करती थी, आपको धन रखने में कष्ट होता था, इस कारण सभी धन नष्ट हो गए और अब जब भगवान बृहस्पति की कृपा से धन मिला है तो आपको फिर से आलस्य होता है।

रानी को समझाते हुए दासी कहती है कि बड़ी योजनाओं के बाद हमने यह धन पाया है, इसलिए हमें दान-पुण्य करना चाहिए, भूखे मनुष्यों को भोजन बनाना चाहिए, और धन को शुभ कार्यों में खर्च करना चाहिए, जिससे आपके कुल का यश बढ़ेगा, स्वर्ग की प्राप्ति होगी और पितृ प्रसन्न होंगे। दासी की बात मानकरानी अपना धन शुभ कार्यों में खर्च करने लगी, जिससे पूरे नगर में उसका यश फैलाने लगा।

बृहस्पतिवार व्रत कथा के बाद श्रद्धा के साथ आरती की होनी चाहिए। इसके बाद प्रसाद बांके उसे अपना कर लेना चाहिए।

बृहस्पतिवार के व्रत की आरती | बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। भक्त / दास जनों के हालात, पल में दूर करे ज ॐ जय जगदीश हरे ...

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का, स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, दुख मिटे तन का आव ॐ जय जगदीश हरे ...

माता-पिता तुम मेरे, शरण गेहूँ मैं व्हकी, स्वामी शरण गेहूँ मैं। तुम / प्रभु बिन और न दूजा, आस करूँ मैं जिसका न ॐ जय जगदीश हरे ...

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी, स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी, ॐ जय जगदीश हरे ...

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता, स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, मैं सेवक तुम स्वामी, कृपा करो भर्ता ल ॐ जय जगदीश हरे ...

तुम एक अगोचर हो, सबके प्राणति, स्वामी सबके प्राणति। किस विधि मिलूँ दयामय / गोसाईं, तुमको मैं कुमति दया ॐ जय जगदीश हरे ...

दीन प्रबंधधु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे, स्वामी तुम रक्षक मेरे। अपने हाथ उठाओ, अपनी शरण लगाओ, द्वार पड़ा मैं तुम्हारा, ॐ जय जगदीश हरे ...
विषय-विन्यास हटाओ, पाप हरो देवा, स्वामी स्वामी हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति उठो, श्रद्धा-प्रेम बढ़ाओ, सन्तन की सेवा बढ़ा ॐ जय जगदीश हरे ...

तन मन धन सब कुछ है तेरा, स्वामी सब कुछ है तेरा। तेरा तुझको अर्पण, क्यागे मेरा अ ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी! जय जगदीश हरे। भक्त / दास जनों के हालात, पल में दूर करे ज ॐ जय जगदीश हरे

बृहस्पतिवार के उद्यापन की विधि | बृहस्पतिवार व्रत कथाएँ इन हिंदी

बृहस्पतिवार के उद्यापन की विधि - बृहस्पतिवार के उद्यापन के एक दिन पहले 5 चीजों की सामग्री लाकर रख ले -
 चने की दाल, 
  1. गुड़, 
  2. हल्दी, 
  3. केले, 
  4. पपीता 
  5. और पीले कपड़े 

और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा रख दें। फिर गुरुवार को हर व्रत की तरह पूजा करने बाद प्रार्थना करे की आपने संकल्प के अनुसार अपने 16 व्रत पूरे कर लिए हैं 
और भगवान बृहस्पति और विष्णु भगवन आप पर कृपा बनाये रखें, और आज आप पूजन का उद्यापन करने जा रहे हैं और पूजा करें - ये सभी सामग्री भगवान विष्णु की है। को चढ़ाकर किसी ब्राह्मण को दान करे उनका आशीर्वाद ले ।

इस विधि से व्रत करने से आपके सभी कष्ट दूर होंगे और आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी।

Post a Comment

0 Comments

close