काली डायन की कहानी हिंदी में | Kali Dayan ~thekahaniyahindi

काली डायन की कहानी हिंदी में | Kali Dayan ~thekahaniyahindi
काली डायन की कहानी हिंदी में | Kali Dayan ~thekahaniyahindi

काली डायन की कहानी हिंदी में | Kali Dayan ~thekahaniyahindi | वो काली रात और दोमुँहीं डायन 

हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? तो आज फिर आपका भाई हाजिर हैं एक 

काली डायन की कहानी हिंदी की स्टोरी के साथ |

दोस्तों आज की यह कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित हैं जिसको मेने एक काल्पनिक नाम देके बताया हैं |

तो दोस्तों काली डायन की कहानी को पूरी जरूर पढ़े क्योकि कहानी बहोत ही जबरदस्त होने वाली हैं |


काली डायन की कहानी



पिताजी तो कह रहे थे कि कल सुबह चले जाना। पर खमेसर मानने वाला कहाँ था। वह बार-बार अपने माता-पिता को समझा रहा था कि गाँव आए 10 दिन हो गए, कॉलेज का हर्जा हो रहा है।
एक हफ्ते की छुट्टी थी और मैं 10 दिन गाँव में रुक गया। नहीं, पिताजी, अब मत रोकिए, जाने दीजिए। आज शाम निकलुँगा तो रात-बारात कॉलेज के होस्टल में पहुँच जाऊँगा।
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कल से कॉलेज ज्वाइन कर लूँगा। और साथ ही वह अपने माता-पिता को यह भी समझाए जा रहा था कि घबरा ने की क्या बात है!
मैं अकेले थोड़े जा रहा हूँ, समेसर भी तो है मेरे साथ। हम दो लोग हैं, आसानी से पहुँच जाएंगे।
जी हाँ! खमेसर गाँव से लगभग 40-45 किमी दूर एक छोटे, अभी पनपते, विकसित हो रहे कस्बे में स्थित एक प्राइवेट इंजिनियरिंग कॉलेज से बी टेक कर रहा था और उसके साथ ही उसके गाँव का समेसर भी।
दरअसल समेसर के चाचा इसी कस्बे में जल निगम में जेई का काम करते थे। उन्होंने ही खमेसर और समेसर का नाम यहाँ लिखवा दिया था।
दरअसल इस कॉलेज के संरक्षक से समेसर के चाचा की खूब बनती थी।
खमेसर और समेसर को होस्टल भी आसानी से मिल गया था, जिसके लिए उन दोनों को बहुत कम पे करना पड़ता था।
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खमेसर ने फटाफट अपनी माँ से कहा कि थोड़ा अचार-ओचार रख दो और 4-6 भेली गुड़ भी।
फिर क्या था, खमेसर ने अपना पिट्ठू बैग पीठ पर लटकाया, माता-पिता को प्रणाम किया और बाय-बाय करते हुए तेजी से समेसर के घर की ओर दौड़ चला।
समेसर खमेसर का ही इंतजार कर रहा था। फिर क्या था, समेसर के बड़े भाई ने उन दोनों को मोटरसाइकिल पर बिठाया और चौराहे पर ले जाकर छोड़ दिए।
चौराहे पर खड़े-खड़े वे दोनों अपने होस्टल की ओर जाने वाली सवारी का इंतजार करने लगे।
कभी-कभी पिछड़े इलाकों में सवारी की बहुत परेशानी हो जाती है और अगर जाड़े का समय हो तो और भी परेशानी।
शाम होते ही सवारियों का आना-जाना कम हो जाता है और रह-रहकर इक्की-दुक्की प्राइवेट गाड़ियाँ ही दौड़ते हुए दिख जाती हैं।

लगभग 2 घंटे के इंतजार के बाद उन्हें एक सिक्स सीटर मिला पर उसने भी कहा कि वह उस कस्बे के बाहर तक ही जा रहा है।
अगर चलना है तो चलो, वहाँ तक छोड़ दूँगा पर तुम लोगों को होस्टल तक नहीं छोड़ पाऊंगा।
कुछ सोच कर समेसर बोला कि, यार खमेसर, घर लौट चलते हैं और कल सुबह होस्टल के लिए निकल चलेंगे।
पर खमेसर कहाँ सुनने वाला था। उसने कहा कि यार वैसे ही बहुत रह लिए गाँव में। कॉलेज बहुत अकाज हो गया।
आज जाना ही है। चलो इसी सिक्स सीटर से चलते हैं और कस्बे से कोई रिक्सा आदि लेकर और नहीं तो पैदल ही होस्टल चले जाएंगे।
कस्बे से पैदल होस्टल जाने में 40-45 मिनट तो ही लगते हैं। इसके बाद खमेसर ने समेसर को खींच कर उस सिक्स सीटर में बैठा लिया। समेसर कुछ बोल नहीं सका और चुपचाप बैठ गया।

कस्बे में पहुँचकर सिक्स सीटर से उतरने के बाद खमेसर और समेसर ने वहीं एक कटरैनी दुकान में चाय पी और उसके बाद रिक्से आदि का इंतजार न करते हुए अपने होस्टल की ओर पैदल बढ़ने लगे।
रात के करीब 9 बजने को थे और ठंड के मारे शरीर में कंपकंपी फैल रही थी।
अच्छी बात यह थी कि इन दोनों दोस्तों के पास कुछ बहुत अधिक सामान नहीं था और जो कुछ भी था, उसे ये दोनों अपने-अपने पिट्ठू बैग में रखकर पीठ पर लटका लिए थे।
खमेसर सीटी बजाकर ठंड को काबू में करने की कोशिश कर रहा था और रमेसर अपने दोनों हाथों को पैंट की जेब में घुसेड़कर तेजी से रास्ते पर बढ़ा जा रहा था।
रात के 9 बजे कोई बहुत समय नहीं होता और फिर लगभग 10 बजे तक ये दोनों होस्टल तो पहुँच ही जाने वाले थे, तो घबरा ने की कोई बात नहीं थी, ऐसा नहीं है!
दरअसल यह अभी डेवलप हो रहा इलाक़ा था इसलिए बहुत ही सुनसान था।
दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था और रात की सांय-सांय भी अपनी ठिठुरनभरी आवाज से उस रात को और भयावह बना रही थी।
होस्टल तक जाने के लिए जो कच्चा रास्ता था, वह उतना बेकार भी नहीं था, ठीक-ठाक था पर इस कच्चे रास्ते से लगभग एक-दो बीघे पर घने-घने बाग-बगीचे थे।
खैर दोनों दोस्त सीटी बजाते, गाना गाते तेजी से बड़े जा रहे थे। हाँ काफी दूर कोई टिमटिमाटी लाइट इनकी राह को आसान बना जाती थी।

लगभग 20-25 मिनट चलने के बाद खमेसर अचानक रुक गया।
खमेसर को रुकता देख, समेसर बोला, अबे रुक क्यों गया? चल, जल्दी चल, ठंड भी लग रही है और थोड़ा डर भी। खमेसर धीरे से उसके पास पहुँचा और आगे रास्ते की ओर इशारा किया।
दरअसल कुछ ही दूरी पर उन्हें एक व्यक्ति नजर आ रहा था पर उस अंधेरी ठंडी रात में थोड़ा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था।
पहले तो खमेसर को लगा कि कहीं कोई चोर-ओर न हो, नहीं तो हमारे पास जो कुछ है, लूट लेगा। फिर वह पछताने लगा कि काश, कल सुबह ही आए होते। पर अब करें तो क्या करें।
वह व्यक्ति भी वहाँ रास्ते से हिलता-डुलता नहीं दिख रहा था और ऐसा लग रहा था कि वहाँ खड़ा होकर किसी का इंतजार ही कर रहा हो।
खैर! खमेसर ने हिम्मत जुटाई और समेसर की बाँह पकड़कर आगे बढ़ने को कहा। फिर क्या था, दोनों दोस्त आगे बढ़ने लगे।
वे लोग, ज्यों-ज्यों उस रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे, सामने का व्यक्ति थोड़ा क्लेयर दिखाई देना शुरू हो गया था।
वे लोग ज्यों ही उस व्यक्ति के पास पहुँचे, हक्के-बक्के हो गए क्योंकि वह तो एक खूबसूरत लड़की थी, जो इन दोनों को देखकर बस मुस्कुराए जा रही थी।
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ये लोग, उस लड़की को क्रास करते हुए आगे बढ़ना चाहे, तभी वह बोल पड़ी, “रुको! होस्टल की ओर जा रहे हो न।
मुझे भी उधर ही जाना है।” दोनों दोस्त कुछ बोल नहीं पाए पर रुक गए। उनके रुकते ही वह लड़की दौड़ कर उनके पास पहुँची और आगे-आगे चलने लगी।
जी हाँ, इन दोनों दोस्तों से लगभग दो कदम आगे।
अचानक समेसर की चीख निकल गई और रमेसर भी हक्का-बक्का हो गया|
दरअसल वह लड़की चलते-चलते अपना सिर पीछे की ओर भी पूरी तरह मोड़ दे रही थी और साथ ही उसके पैर भी कभी-कभी पूरी तरह पीछे की ओर मुड़ जाते थे।
अरे यह क्या, इस लड़की के दो मुँह कैसे, दो सिर कैसे हो सकता है? एक आगे की ओर और एक पीछे की ओर।
इतना ही नहीं उस लड़की की मुस्कान के साथ ही उसके मुँह से प्रकाश सा निकल जाता था, जिसमें ये दोनों दोस्त और पूरा रास्ता नहा जाता था।
अब उन दोनों को सूझ नहीं रहा था कि क्या करें, कहाँ जाएँ? क्या पीछे की ओर भाग जाएँ पर ऐसा करने पर उसने पीछा कर लिया तो?
इसके तो दो मुँह हैं, आगे भी देख सकती है और पीछे भी। क्या करें? अरे अभी ये लोग ये सब सोच ही रहे थे तभी वह अट्टहास करते हुए बोली, अब तुम लोग नहीं बच सकते।
इतना कहते ही वह पूरी तरह से विकराल हो गई। उसके लंबे-लंबे दाँत और लंबी लपलपाती चीभ देखकर कोई भी सहम जाए।
दो सिर वाली वह डायन बहुत ही विभत्स और भयानक थी। वह पूरी तरह से किसी अति डरावनी हारर फिल्म की भूतनी से भी भयानक लग रही थी।
खमेसर काँपते हुए जय हनुमान-जय हनुमान करने लगा और समेसर तो खमेसर के पीछे खड़ा होकर उसे पकड़कर फूट-फूट कर रोने लगा।
अचानक ये दोनों दोस्त कुछ समझ पाते तभी उस डायन ने अपना हाथ बढ़ाकर इन दोनों के बैग छिन लिए और उन्हें घूमाकर इतना तेज फेंकी कि पता नहीं चला कि वे दोनों बैग उस अंधेरी रात में कहाँ गायब हो गए।
फिर वह डायन हवा में उड़ने लगी। उसके अट्टहास से पूरा माहौल अति डरावना हो गया।
उसके मुँह से निकलते आग के गोलों से लगता था कि ये दोनों जलकर भस्म हो जाएंगे। अब तो दोनों पूरी तरह से अवाक, बेहोशी की हालत में आ गए और वहीं बैठ गए।
उन्हें कुछ भी सूझ नहीं रहा था। उन दोनों ने एक दूसरे को पकड़कर अपनी आँखें बंद कर ली और लगे हनुमानजी को गोहराने।
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अचानक उन्हें एक और आवाज़ सुनाई दी जो उन्हें डरो नहीं कह रही थी।
उन दोनों ने जब आँखें खोली तो क्या देखते हैं कि एक और खूबसूरत लड़की खड़ी है जो इन्हें हाथों के इशारों से शांत होने और उठने का इशारा कर रही है।
अभी ये दोनों कुछ समझ पाते तब तक वह पहली वाली डायन वहाँ अट्टहास करते हुए बोली, “आज तो तूने बचा लिया, इन दोनों को।
पर कब तक लोगों को बचाती रहोगी। मैं तुमसे बहुत जल्द निपटूँगी, तुम्हारा नामो-निशाँ मिटा दूँगी।”
अभी वह चुड़ैल कुछ और बोले इसके पहले ही वह दूसरी लड़की कुछ बुदबुदाई और एक तेज फूँक उस डायन की ओर मारी।
अरे, यह क्या, बचाओ, बचाओ की आवाज़ करते हुए वह चुड़ैल पूरी तरह से पता नहीं कहाँ गायब हो गई।
अब इन दोनों दोस्तों को थोड़ी राहत मिली। उस लड़की ने फिर कहा, डरो नहीं, मैं माँ काली की भक्त हूँ। यहीं पास के कस्बे में रहती हूँ।
चलो तुम लोगों को तुम्हारे होस्टल छोड़कर आती हूँ। इसके बाद दोनों दोस्त तेजी से होस्टल की ओर बढ़ निकले और उनके पीछे-पीछे कुछ दूरी पर वह लड़की भी उनके पीछे-पीछे चलने लगी।

होस्टल के पास पहुँचने पर उस लड़की ने कहा कि अब तुम लोग जाओ, मैं वापस अपने घर जा रही हूँ।
दोनों दोस्त उसका आभार मानते हुए अपने होस्टल के गेट पर पहुँच गए। होस्टल के गेट पर दो वाच मैन आग जलाए बैठे हुए थे।
इन दोनों को देखते हुए एक वाच मैन ने गेट खोला और पूछा इतनी रात को तुम लोग कहाँ से आ रहे हो?
फिर इन दोनों दोस्तों ने वहीं वाच मैन द्वारा दी हुई बोतल से दो-दो घूँट पानी पीए और आग सेंकते-सेंकते पूरी घटना बता दिए।
उनकी पूरी बात सुनते ही एक वाच मैन बोल पड़ा, “अच्छा हुआ कि गुड़िया आ गई, नहीं तो तुम लोगों का क्या हाल होता, तुम लोग समझ नहीं पाते। तुम लोगों का भाग्य बहुत ही अच्छा है कि गुड़िया आ गई।
बहुत भली है वो, बहुत भली।” फिर उसने बताया कि गुड़िया उसके ही गाँव की एक लड़की थी, जो माँ काली की बहुत बड़ी भक्त थी।
वह पढ़ने में भी बहुत ही तेज थी। पर विधि का विधान। वह मोटर साइकिल चलाना सीख रही थी और इसी रास्ते पर उसकी मोटर साइकिल एक टैक्टर से टकरा गई थी।
उसे तुरंत अस्पताल पहुँचाया गया पर डाक्टर उसे बचा नहीं सके। पर आज भी वह मर कर भी जिंदा है और लोगों की मदद किया करती है।
अपने अच्छाई के बल पर वह दुष्ट आत्माओं को अपने अधीन कर लेती है। उसने आज तुम लोगों को भी बचा लिया।
उसने मुझे भी एक बार पानी में डूबने से बचाया था। मेरी तो जान ही जाने वाली थी।
कुछ बुरी आत्माएँ मुझे एक बार बरसाती पानी में डुबाने की कोशिश कर रही थीं पर सही समय पर गुड़िया आ गई और मेरी जान बच गई।
इसके बाद उस वाच मैन ने उस दोमुहीं, दो सिर वाली डायन के बारे में बताया।
दरअसल एक दुर्घटना में वह इसी रास्ते पर मर गई थी और उसका सिर दो भागों में फटकर बँट गया था।
तब से वह कभी-कभी रात में इस रास्ते पर घूमते हुए दिख जाती है और कुछ लोगों को बहुत परेशान भी कर देती है।


तो दोस्तों उम्मीद हैं आज की यह भूतिया कहानी काली डायन की कहानी हिंदी में आप लोगो को जरूर पसंद आई होगी | धन्यवाद

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