Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story | जंगल की चुड़ैल or भूतिया हॉस्पिटल ~ thekahaniyahindi

Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story | जंगल की चुड़ैल or भूतिया हॉस्पिटल

Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story | जंगल की चुड़ैल or भूतिया हॉस्पिटल :- हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? आपका फिर हाजिर हैं, एक नई भूतिया स्टोरी के साथ। दोस्तों अगर आप Google पर अगर Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story | जंगल की चुड़ैल or भूतिया हॉस्पिटल सर्च कर रहे हैं तो आप बिलकुल सही जगह आये हो।

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Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story में हम आपके लिए 2 भूतिया कहानी "जंगल की चुड़ैल" or "भूतिया हॉस्पिटल" लेके आये हैं इन दोनों भूतिया कहानियो में हम आपको ऐसे रहस्य की सैर कराने जा रहे हैं, जिसमें प्रवेश करने के बाद लोग थर-थर कांप ने लगते हैं। ऐसा माहौल जिसमें आपको डर का एक नया एहसास होगा।

Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story | जंगल की चुड़ैल


ये कहानी सत्य घटना पर आधरित हैं !
माता जी  से सुनी हुई ये कहानी हमारे नाना जी के जीवन चक्र की एक घटना को दर्शाती हैं! 

एक दिन की बात हैं , ठंड का समय था घना कोहरा छाया था सारे लोग जल्दी  कार्यालय का काम ख़त्म करके घर की तरफ निकल रहे थे ! नाना जी उस समय के बड़े अधिकारियों मे से एक थे !

वे उस समय के उच्च वर्ग के लोगों मे एक अमीन का काम करते थे ! रोज की तरह ही उस दिन कम ख़त्म होने के बाद घर के लिए अपनी गाड़ी से रवाना होने लगे ! रास्‍ते में उन्हे हाट से कुछ समान भी लेना था तो वे और साथियों से अलग हो गये ! उन्होने घर की कुछ जरूरत के समान लिए और गाड़ी आगे बढ़ा दी !

आगे जाने पर उन्हे कुछ मछली बाज़ार दिखा और वे मछली खरीदने के लिए रुक गये ! ताज़ी मछलियाँ लेने और देखने मे टाइम ज़्यादा ही गुजर गया ! उनकी जब अपनी घड़ी पर नज़र गई तो उन्हे आभास हुआ की आज तो घर जाने मे बहुत देर हो जाएगी और ये सब लेकर घर पहुचने मे काफ़ी समय लग जाएगा !

फिर यही सब सोच कर उन्होने सोचा कि क्यू ना जंगल के रास्ते से निकला जाए तो जल्दी पहुँच जाउँगा ! तो उन्होने अपना रास्ता बदला और जंगल की तरफ़ अपनी गाड़ी को घुमा लिया !

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| Bhut Story | जंगल की चुड़ैल 

समय ११  बज चुका  था  गाड़ी तेज रफ़्तार से आगे बढ़ रहां  था  तभी अचनाक तेज ब्रेक के साथ गाड़ी को रोकना पड़ा !
उनकी गाड़ी के आगे एक औरतज़ोर २ से रो रही थी!

उन्होने सोचा इस वीराने मे ये औरत क्या कर रही हैं उन्हे लगा की कोई मजदूर की पत्नी होगी जो नाराज़ होकर घर छोड कर जॅंगल मे भाग आई हैं तो उन्होने उससे पूछा की यहाँ जॅंगल मे तुम क्या कर रही हो? 

लकिन उसने कोई जवाब न देकर और ज़ोर २ से रोने लगी!
सारे जंगल मे उसकी हूँ हूँ  सी सिसकियाँ गूँज रही थी!
फिर नाना जी ने पूछा तुम्हारा घर कहाँ हैं?
लेकिन वो कुछ भी ना बोली!

तब नाना जी ने कहा की आज चलो मेरे घर मे रहना सुबह अपने घर चली जाना ये जॅंगल बहुत सारे जंगली जानवर से भरा हे रात भर यहाँ मत रूको चलो आज मेरे घर मे सब के लिए खाना बना देना और कल सुबह अपने घर चली जाना ! उसने ये सुना तो झट से तैयार हो गई ! और गाड़ी मे पीछे की सीट पर बैठ गई!

सिर मे बड़ा सा घूँघट डालने की वजह से उसका चेहरा छिपा हुआ था ! कुछ  ही देर मे गाड़ी घर के दरवाजे पे थी! घर के लोग कब से उनकी राह देख रहे थे !

गाड़ी रुकते ही पापा  ने पूछा आज तो बहुत देर हो गई और सारे लोग आ भी चुके हैं ! तब उन्होने सारी बातें अपनी माँ को बताई और कहा की आज खाना इससे बनवा लो कल सुबह ये अपने घर चली जाएगी!

इतनी रात को बेचारी जंगल मे कहा भटकती ! इसलिए मैं ले आया ! 

पर पापा  को कुछ संदेह हो रहा था की कहीं चोर तो नहीं हे रात को सोने के बाद या खाना बनाते समय कहीं घर के सामान ही चुरा कर ना ले जाए! 

पर बेटे की बात को कैसे माना करती !

उन्होने उस औरत को कहा देखो आज तो मैं रख ले रही हूँ लेकिन कल सुबह होते ही यहाँ से चली जाना!

और जाओ रसोई मे ये समान उठा कर ले जाओ और खाना बना दो ! 

उसने फिर से जवाब नहीं दिया !

बस हूँ हूँ हूँ की   आवाज  बाहर आयी !

और वो सारा सामान लेकर माँ के पी छे  बहुत  दूर   चल दी!

रसोई मे सारा सामान रखवा कर माता  जी  ने उसे खाना जल्दी बनाने की सख्‍त हिदायत दी! 

और वहाँ से चली गई !
लेकिन उनका मन कुछ परेसान सा था ! 

फिर १०  मिनट मे रसोरे मे उसे देखने चली गई की वो क्या कर रही हे और उसका चेहर भी देखना चाहती थी!

लेकिन .....................................................................

वहाँ पहुची तो देखा की वो मछलियों का थैला निकल रही थी! 

उन्होने बहुत ज़ोर से गुस्से मे कहा यहाँ सब खाने का इंतजार कर रहे हे और तुम अभी तक मछलियाँ ही निकल रही हो कल सुबह तक बनाओगी क्या?

उसके सिर पर घूँघट अभी भी था तो चेहरा देखना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन  था !

उन्होने उससे कहा तुम जल्दी से खाने की तैयारी करो मैं आग सुलगा देती हूँ काम जल्दी हो जाएगा !

और वे जल्दी से चूल्हा जलाने की तैयारिया करने लगी !

लेकिन साथ ही वो उसका चेहरा देखने की भी कोशिश कर रही थी !

लेकिन वो जितना देखने की कोशिश करती वो और पल्लू खींच लेती! अंत मे हार कर वे बोली देखो मैने आग सुलगा दी हैं अब आगे सारा काम कर लो !
कुछ ज़रूरत हो तो बुला लेना ! लेकिन वो फिर कुछ नहीं बोली ! अब उन्हें लगा की यहाँ से जाने मे ही ठीक हैं ! वरना मेरा भी समय खराब होगा और हो सकता हैं अंजान लोगों से डर रही हो ! 

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जंगल की चुड़ैल 

ये सब सोच कर उन्होंने उसे कहा की मैं आ रही हूँ जल्दी से खाना बना कर रखना ! 

और वहाँ से निकल गई !

मन अभी तक परेसांन ही था !

कभी अपने कमरे कभी बच्चों के कभी बाहर सब को देख रही थी, कहीं कुछ अनहोनी ना हो जाए!

एक मिनट भी आराम से नहीं बैठ पाई !

अभी पाँच मिनट ही हुए थे पर उनके लिए वो घड़ी पहाड़ सी हो रही थी !
समय बीत ही नहीं रहा था ! 

आठ मिनट बड़ी मुश्किल से गुज़रे और वे तुरंत ही कुछ सोच कर रसोरे की तरफ दौड़ी !

और वहाँ पहुँच कर आया

जैसे ही उन्होने रसोई घर का नज़ारा देखा , उनकी आँखे फटी की फटी रह गई ! उनके पैर बिल्कुल ही जम गये ना उनसे आगे जाया जा रहा था ना ही पीछे ! 

उनके हृदय की धडकने रुक रही थी ! 

वो औरत रसोरे मे बैठ कर सारी कच्ची मछलिया खा रही थी !
सारे रसोरे में मछलियाँ और खून बिखरा पड़ा था !

उसके सिर से घूँघट भी उतरा पड़ा था !
इतना खौफनाक चेहरा आज तक उन्होने नहीं देखा था !
बाल, नाख़ून सब बढ़े हुए थे ! 

मछलियाँ खाने मे मगन होने की वजह से उसे कुछ ध्यान भी नहीं था !
और खुशी से कभी २ वो आवाज़े भी निकल रही थी !

हूँ हूँ सी आवाज़े गूँज रही थी ! 

रसोरा पिछवारे मे होने की वजह से और लोगों का ध्यान भी इधर नही आ रहा था !

माँ को भी कुछ नहीं समझ आ रहा था , कि चिल्लाने से कहीं घर के लोगों को नुकसान ना पहुचाए !

वो चुड़ैल से अपने घर को कैसे बचाए उन्हे समझ नहीं आ रहा था !
बस भगवान का नाम ही उनके दिमाग़ मे आ रहा था !
अचानक वे आगे बढ़ने लगी उसकी तरफ !

और झट से एक थाल लिया और चूल्‍हे की तरफ दौड़ी ! उस चुरैल  की नज़र भी पापा  पर पड़ चुकी थी सो वो भी कुछ सोच कर उठी अपनी जगह से !

माँ कुछ भी देर नहीं करना चाहती थी , उन्हे पता था की आज अगर ज़रा सी भी लापरवाही हुई तो अनहोनी हो जाएगी !

उस चुरैल के कुछ करने से पहले ही उन्हे चूल्‍हे तक पहुचना था !
और चूल्‍हे के पास पहुँच कर उन्होने जलता हुआ कोयला थाल मे भर लिया !
और चुड़ैल की तरफ लेकर जोर से फेंका ! 

आग की जलन की वजह से वो अजीब सी डरावनी आवाज़े निकालने लगी !

अब तो उसकी आवाज़े बाहर भी जा रही थी सारे लोग बाहरसे रसोरे की तरफ भागे !

वो चुड़ैल ज़ोर  से हूँ हूँ  जोर  की आवाज़ निकल रही थी और पूरे रसोरे मे दौड़ रही थी और माता जी  को पकड़ना भी चाह रही थी !

लेकिन अब सारे लग रसोरे मे आ चुके थे काफी  लोगों की भीड़ देख कर वो और भी डर गयी  थी ! 

लोंगों की भीड़ को थेलती हुई वो बाहर जॅंगल की तरफ भाग गये  

और सारे लोग ये मंज़र देख कर डरे साहमे से खड़े थे ! और मन हीं मन माता जी   की हिम्मत की दाद दे रहे थे।
तो ऐसे छूटा चुरैल से पीछा



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दुनिया में रूहों, आत्‍मओं के बारें में बहुत सी भ्रांतिया विकसित है, कई लोगों ने इनका आभास किया है तो कई लोग इन्‍हे देखने का भी दावा करते हैं।

इन रूहों का अस्‍तीत्‍व में कीतनी सच्‍चाई होती हैं इसके बारें में लोग अलग-अलग राय देतें है। लेकिन क्‍या हो तब जब आप किसी ऐसी जगह पर जाएं जिसके बारें में आपने बहुत कुछ सुन रखा हो और उस जगह पर आपकी किसी ऐसी ही अदृश्‍य शक्ति से हो जाये। 

रूहो,आत्‍माओं या फिर किसी भी अदृश्‍स शक्ति, जैसा कि आपकों पूर्व के लेखों में बताया गया है कि इनका शारिरीक रूप से कोई अस्‍तीत्‍व नहीं होता हैं। लेकिन ये बेमिशाल शक्ति की मालिक होती है।

जरा सोचिए जब कोई बगैर शरीर के इतना शक्तिशाली हो कि वो आपकों अपने होने का आभास करा देंता हो वो वास्‍तव में कितना भयानक होगा। 

रूहों के बारें में लोगों के दिमाग में कुछ सवाल हमेशा कौंधतें है कि वो हमेशा एकांत में ही क्‍यों रहती हैं? या फिर वो सामने क्‍यूं नहीं ? वगैरा वगैरा। हम आपकों बतां दें कि उन्‍हे हमारे सामने आने में कोई समस्‍या नहीं होती है।

दोष हमारे आंखों में होता है वो दुनिया के हर कोनें में हर समय मौजूद रहती हैं। बस हम उन्‍हें देख नहीं पातें। उनकी उपस्थिती का अंदाजा आप इसी से लगा सकतें है कि वो शायद इस समय यह लेख पढ़तें समय भी आपकें आस पास मौजूद हो सकती हैं।

ए‍क बात इनके बारें में कहीं जाती है कि जब इनके बारें में सोचा जाता है, या फिर इन्‍हे याद किया जाता है तो ये और शक्तिशाली हो जाती है और आपके सामने आ सकती हैं। 

एक सवाल और जो कि अमुमन लोगों के दिमाग में आता है कि इन आत्‍माओं का जन्‍म कहां से होता हैं। तो मै आपको बता दू कि रूहों का जन्‍म जीवों की मौत के बाद होता हैं।

रूहें या आत्‍माएं केवल इंसानों की ही नहीं होती हैं ये जानवरों की भी होती हैं। जहां तक रहा सवाल इनके आकार या फिर संरचना का तो वो सदैव विचित्र ही होता है जैसा कि हम इंसान पहले कभी नहीं देखें होतें हैं।

आज हम आपकों अपने इस सीरीज के इस लेख में सिंगापूर के एक ऐसे अस्‍पताल के बारें में बताऐंगे जो कि जापानी सैनिकों के इलाज के लिए बनाया गया लेकिन वो उनकी कब्रगाह बन गया। आइऐं चलतें है मौत की उस भयानक सफर पर जहां हम आपकों बताऐंगे पुराने चंगी अस्‍पताल के बारें में। 

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 भूतिया हॉस्पिटल

चंगी अस्‍पताल का इतिहास 
चंगी अस्‍पताल का निर्माण सन 1930 में कराया गया था। यह अस्‍पताल नार्थवन रोड के किनारे चंगी गांव के पास बनाया गया था इसीलिए इसका नाम चंगी अस्‍पताल पड़ गया। उस समय इस यह एक मिलीट्री अस्‍पताल हुआ करता था।

द्वितीय विश्‍व युद्व के दौरान सिगापुर के चंगी गांव के आस-पास जापानियों का कब्‍जा हो गया था। उस समय हजारों की संख्‍या में जापानी सैनिक इस अस्‍पताल में लायें गये थे। 

इस अस्‍पताल में उन सैनिकों का इलाज किया जाता था। इलाज के दौरान इस अस्‍पताल में सैनिकों को उपचार देने के लिए पर्याप्‍त साधन मौजूद नहीं थी। इसके अलांवा रोजाना सैकड़ों की संख्‍या में घायल जवानों के आनें का सिलसिला जारी था।

उस समय इस अस्‍पताल में नर्स, चिकित्‍सक और कुछ सुरक्षाकर्मी भी थे। सैनिक इतने ज्‍यादा घायल होतें थें कि उनको बचाना कठिन होता था और देखते देखते हजारों की संख्‍या में जवानों की मौत होनें लगी। 

अस्‍पताल में हो रही इन मौतों के कारण अस्‍पताल में एक भयानक बिमारी ने जन्‍म ले लिया और यह बिमारी अस्‍पताल के स्‍टाफ में भी फैल गयी। इस अस्‍पताल में काम करने वालें दो नर्सो की भी बिमारी के चलते मौत हो गयी।

इसके अलांवा एक चिकित्‍सक की भी मौत हो गयी। यह अस्‍पताल एक बहुत ही विशाल भवन था, इसमें कई ब्‍लाक थे। साथ ही इसमें बहुत ढेर सारे वार्ड भी थे। 

अस्‍पताल में रूहों का बसेरा

लगातार हो र‍ही मौतों के कारण यह अस्‍पताल उस समय एक मनहूस जगह बन चुकी थी। उस समय जो जवान घायल अवस्‍था में लायें गये थे उसमें से बहुत कम ही जिंदा वापस जा सके थे।

ज्‍यादातार जवानों की वहीं पर मौत हो गयी थी। जिसके कारण उस अस्‍पताल में मर चुके जवानों की रूहे भटकने लगी और देखते देखते कुछ दिनों में वहीं उनका बसेरा हो गया। 

उस समय से लेकर आज तक उन जवानों की रूहों को उस अस्‍पताल में साफ महसुस किया जाता हैं। जवानों के लाशों को उस समय अस्‍पताल के पिछे एक ब्‍लाक में जिसे मर्च्‍यूरी कहा जाता था, वहां रखा जाने लगा।

रोजाना सैकड़ों लाशें लायी जाने लगी और मौत का तांडव शुरू हो चुका था। अस्‍पताल के दूसरे माले पर कई बार रात में लोगों ने एक वृद्व व्‍यक्ति का साया देखा इसके बारें में अस्‍पताल प्रबंधन को भी बताया गया लेकिन इस मामलें पर किसी ने भी ध्‍यान नही दिया। 

एक बार एक व्‍यक्ति दूसरे माले से अचानक गिर गया और वो बुरी तरह जख्‍मी हो गया जब अस्‍पताल में उसका इलाज किया जा रहा था। उस वक्‍त उसने बताया कि उसे ऐसा महसूस हुआ कि किसी ने उसे बलपूर्वक धक्‍का दे दिया हो और कुछ दिनों बाद उस व्‍यक्ति की मौत हो गयी।

उसके उसके बाद से दूसरे माले पर लोग अकेले जानें में डरने लगे। कई लोगों ने दावा किया कि उस माले पर किसी के ठहाके लगा कर हंसने की भी आवांजे आती हैं। 

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Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi |

अस्‍पताल में एक नर्स का साया

अस्‍पताल में एक नर्स का साया भी बहुचर्चित हैं। एक बार एक जवान का इलाज करते समय एक नर्स से कुछ गलती हो गयी। उस समय जवान गुस्‍से में उसे बुरी तरह मारने पीटने लगा।

उस समय वो नर्स पेट से गर्भवती थी और उस जवान ने पैर से उसके पेट पर भी वार कर दिया। पेट पर वार करते ही वो नर्स जमीन पर तड़पने लगी और मौके पर ही उसकी मौत हो गयी। 

तब से लेकर आज तक कई बार उर्स नर्स के साये को वहां देखा गया हैं। उस नर्स का साया आज भी कभी जमीन पर रेंगती है और खुद को बचाने का गुहार लगाती हैं।

कभी कभी वो अपने हाथ में एक खंजर लिए घुमती हैं। एक व्‍यक्ति ने दावा किया कि वो जब अस्‍पताल के तीसरे माले पर गया था तो उसने वैसी ही एक महिला का साया देखा था और जब उसने उसके करीब जाने की कोशिश की तो वहां पर महिला, और बच्‍चे की रोने की आवाज आने लगी जिसके कारण वो वहां से भाग खड़ा हुआ। 


अस्‍पताल में जिंदा चौकीदार 

चौकिदार का भूत, इस अस्‍पताल में कहीं भी मिल जाता हैं। इस चौकीदार के बारें में कई लोगों ने दावा किया है कि उन लोगों ने उससे बात भी की हैं। कुछ ऐसा ही मामला दो भाईयों के साथ भी हुआ था।

दोनों भाई अपने स्‍कुल से वापस लौट कर इस अस्‍पताल में घुमने के लिए आयें थे। अस्‍पताल के गेट पर आकर उन्‍हाने अपनी बाइक खड़ी की और अस्‍पताल के अंदर दाखिल हो गये। 

अभी वो कुछ ही दूर गये थे कि तभी अस्‍पताल का चौकीदार उनकी पास आ गया। चूकि दोनों भाई पहली बार उस अस्‍पताल में आयें थे और पुरा अस्‍पताल विरान था तो उन दोनों भाईयों ने उससे बातें करनी शुरू कर दी।

जब वो कुछ दूरी पर बात करते गये और दूसरे माले पर पहुंचे तो चौकिदार ने एक भाई का हाथ पकड लिया और कहा कि बस बहुत घुम लिया तुम लोगों ने अब घर जाओं। 

जैसा कि दोनों भाईयों ने बताया कि उस आदमी के पास से भयानक बदबू आ रही थी, और उसकी आवाज भी काफी भारी थी। जब उसने ये बात कही तो हम डर गये क्‍यूंकि कई बार हम लोगों ने उस अस्‍पताल के बारें में सुना था और अंधेरा भी हो रहा था।

इसलिए हम वापस आने लगे। जब हम वापस आ रहे थे तो हमने चौकीदार से पुछा कि आप कहां रहते हैं। 

तो चौकीदार ने उसी तरफ इशारा किया जिधर उसने हमे जाने से रोका था। फिर हमने पुछा कि आप यहां क्‍या करते है तो उसने बताया कि मै कई सालों से इस अस्‍पताल में लोगों की सेवा करता हूं।

लेकिन मुझे बहुत दुख है कि यह अस्‍पताल अब बंद होग गया हैं। लेकिन मै इसे नहीं छोड सकता इतना कह कर वो सिडीयों से निचे उतरने लगा। हम दोनों उसके पीछे पीछे नीचे उतरे लेकिन वो नीचे कहीं भी नहीं था। 

इतना देखकर हम दोनों वहा से निकल गये और बाइक के पास आ गये हम दोनों काफी डरे हुए थे, और जल्‍दी जल्‍दी में बाइक का लाक भी नहीं खोल पा रहे थे। इसी समय एक भाई की नजर दूसरे के हाथ पर पड़ी जिसका हाथ को उस चौकीदार ने पकड़ा था। उसके कलाई पर एक काला निशान बन गया था। इतना देखते ही दोनों घबरा गये और वहां से भाग निकले। 

इस अस्‍पताल में चारों तरफ रूहों का कब्‍जा हैं। कभी भी आप इन रूहों को महसूस कर सकते है। लेकिन इस अस्‍पताल में अकेले घुमने नहीं दिया जाता हैं।

क्‍योकि ऐसा माना जाता है कि कई बार रूहो को अहसास मात्र से कई लोगों के साथ हादसें हो गये हैं। विशेषकर दूसरे माले पर वहां से अब तीन लोगों की अपने आप ही गिरने से मौत हो गयी हैं। यदि आपकों इन्‍हे महसूस करना है तो कभी भी अकेले न जायें।

तो दोस्तों उम्मीद हैं आप लोगो को आज की कहानीया Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story | जंगल की चुड़ैल or भूतिया हॉस्पिटल में आप लोगो को पसंद आई तोकमेंट करके जरूर बताये और साथ ही दोस्तों Bhoot ki Kahani Lyrics in Hindi | Bhut Story को Facebook, Twitter पर जरूर शेयर करे। अगर आप भी अपनी कोई स्टोरी हमारे ब्लॉग पर पब्लिश करवाना चाहते हैं तो हमें भेजे हम आपके नाम के साथ पब्लिश करेंगे। आपके विचारो का हमारे यहाँ स्वागत हैं।

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