Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3 नैतिक कहानियां - thekhanaiyahindi

Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3 नैतिक कहानियां


Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3 :- हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? आपका फिर हाजिर हैं,  Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3 के साथ। दोस्तों अगर आप Google पर अगर Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3 सर्च कर रहे हैं तो आप बिलकुल सही जगह आये हो।
Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3में  बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

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Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3



  1. "घमंडी पर्वत व छोटा सा चूहा", Moral Stories In Hindi For Class 3
  2. अकल की दुकान (Wisdom shop) For Class 3 Moral Stories In Hindi
  3. कंजूस मित्र Short Stories For Class 3
  4. आखिर एक स्त्री चाहती क्या है ? Moral Stories In Hindi For Class 3
  5. "नेकी की राह (The way of righteousness)" Hindi Stories  For class 3 Kids
  6. पड़ोसन का बर्तन Hindi Story For Class 3 With Picture
  7. पिंजरे का बंदर Stories For Class 3
  8. एक बिल्ली स्वर्ग में In Hindi Stories For Class 3
  9. कहानी ” एकता का बल ” In Hindi Moral Stories For Class 3
  10. सेठ जी की युक्ति Moral Stories In Hindi For Class 3

  "घमंडी पर्वत व छोटा सा चूहा" Moral Stories In Hindi For Class 3


एक जंगल में एक विशाल पर्वत था । एक दिन उस विशाल पर्वत ने जानवरों को देखा , जंगल को देखा और फिर खुद को देखा । उसे अपने आकार पर बहुत घमंड हुआ उसने कहा मैं सबसे शक्तिशाली हूं , मैं ही तुम्हारा ईश्वर हूँ । पर्वत की यह बातें सुनकर सभी जानवरों को बहुत गुस्सा आया । घोड़े ने आगे बढ़कर कहा – ओ घमंडी पर्वत अपने आप पर इतना घमंड मत कर  । एक क्षण में तुम्हें दौड़ कर पार कर सकता हूं , पर घोड़ा लड़घड़ा कर गिर गया ।
      पर्वत दिल खोलकर हंसा , इसी तरह हाथी ,ऊँट ,जिराफ सभी ने कोशिश की पर वे पहाड़ का कुछ बिगाड़ नहीं पाए अब सभी जानवरों को अपना दोस्त चूहा याद आया । चूहा पर्वत के पास आया और उसने पर्वत को चुनौती दी । पर्वत ने चूहे का खूब मजाक उड़ाया । चूहे ने मुस्कुराते हुवे पर्वत में छेद बनाना प्रारंभ किया । अन्य चूहों ने भी पर्वत में छेद करना चालू कर दिया । पर्वत घबरा गया उसने सभी जानवरों से माफी मांगी । इस तरह पर्वत के घमंड को एक छोटे से चूहे ने तोड़ दिया ।
(Moral Stories In Hindi For Class 3) शिक्षा :-  इसलिए कभी अपने बड़े होने का घमंड नही करना चाहिए !  

अकल की दुकान (Wisdom shop), For Class 3 Moral Stories In Hindi

एक रौनक नाम का व्यक्ति था। जैसा नाम वैसा रूप। अकल में भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा- 'यहां अकल बिकती है।'
उसका घर बीच बाजार में था। हर आने-जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था। हर कोई बोर्ड देखता, हंसना और आगे बढ़ जाता। रौनक को विश्वास था कि उसकी दुकान एक दिन जरूर चलेगी।
एक दिन एक अमीर महाजन का बेटा वहां से गुजरा। दुकान देखकर उससे रहा नहीं गया। उसने अंदर जाकर रौनक से पूछा- 'यहां कैसी अकल मिलती है और उसकी कीमत क्या है? '
उसने कहा,- 'यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम इस पर कितना पैसा खर्च कर सकते हो।'
गंपू ने जेब से एक रुपया निकालकर पूछा ;- 'इस रुपए के बदले कौन-सी अकल मिलेगी और कितनी?'
रौनक ने कहा ;-  ' भई, एक रुपए की अकल से तुम एक लाख रुपया बचा सकते हो।'
गंपू ने एक रुपया दे दिया। बदले में रौनक ने एक कागज पर लिखकर दिया- 'जहां दो आदमी लड़-झगड़ रहे हों, वहां खड़े रहना बेवकूफी है।'
गंपू घर पहुंचा और उसने अपने पिता को कागज दिखाया। कंजूस पिता ने कागज पढ़ा तो वह गुस्से से आगबबूला हो गया। गंपू को कोसते हुए वह पहुंचा अकल की दुकान। कागज की पर्ची रौनक के सामने फेंकते हुए चिल्लाया- 'वह रुपया लौटा दो, जो मेरे बेटे ने तुम्हें दिया था।'
रौनक ने कहा ;- 'ठीक है, लौटा देता हूं। लेकिन शर्त यह है कि तुम्हारा बेटा मेरी सलाह पर कभी अमल नहीं करेगा।'
कंजूस महाजन के वादा करने पर रौनक ने रुपया वापस कर दिया।
उस नगर के राजा की दो रानियां थीं। एक दिन राजा अपनी रानियों के साथ जौहरी बाजार से गुजरा। दोनों रानियों को हीरों का एक हार पसंद आ गया। दोनों ने सोचा- 'महल पहुंचकर अपनी दासी को भेजकर हार मंगवा लेंगी।' संयोग से दोनों दा‍सियां एक ही समय पर हार लेने पहुंचीं। बड़ी रानी की दासी बोली ;- 'मैं बड़ी रानी की सेवा करती हूं इसलिए हार मैं लेकर जाऊंगी'
दूसरी बोली ;- 'पर राजा तो छोटी रानी को ज्यादा प्यार करते हैं, इसलिए हार पर मेरा हक है।'
गंपू उसी दुकान के पास खड़ा था। उसने दासियों को लड़ते हुए देखा। दोनों दासियों ने कहा- 'वे अपनी रानियों से शिकायत करेंगी।' जब बिना फैसले के वे दोनों जा रही थीं तब उन्होंने गंपू को देखा। वे बोलीं- यहां जो कुछ हुआ तुम उसके गवाह रहना।'
दासियों ने रानी से और रानियों ने राजा से शिकायत की। राजा ने दासियों की खबर ली।दासियों ने कहा ;- 'गंपू से पूछ लो वह वहीं पर मौजूद था।'
राजा ने कहा ;- 'बुलाओ गंपू को गवाही के लिए, कल ही झगड़े का निपटारा होगा।'
इधर गंपू हैरान, पिता परेशान। ‍आखिर दोनों पहुंचे अकल की दुकान। माफी मांगी और मदद भी।
रौनक ने कहा ;- 'मदद तो मैं कर दूं पर अब जो मैं अकल दूंगा, उसकी ‍कीमत है पांच हजार रुपए।
मरता क्या न करता? कंजूस पिता के कुढ़ते हुए दिए पांच हजार। रौनक ने अकल दी कि गवाही के समय गंपू पागलपन का नाटक करें और दासियों के विरुद्ध कुछ न कहे।
अगले दिन गंपू पहुंचा दरबार में। करने लगा पागलों जैसी हरकतें। राजा ने उसे वापस भेज दिया और कहा- 'पागल की गवाही पर भरोसा नहीं कर सकते।'
गवाही के अभाव में राजा ने आदेश दिया ;- 'दोनों रानी अपनी दासियों को सजा दें, क्योंकि यह पता लगाना बहुत ही मुश्किल है कि झगड़ा किसने शुरू किया।'
बड़ी रानी तो बड़ी खुश हुई। छोटी को बहुत गुस्सा आया।
गंपू को पता चला कि छोटी रानी उससे नाराज हैं तो वह फिर अपनी सुरक्षा के लिए परेशान हो गया। फिर पहुंचा अकल की दुकान।
रौनक ने कहा ;- 'इस बार अकल की कीमत दस हजार रुपए।'
पैसे लेकर रौनक बोला ;- 'एक ही रास्ता है, तुम वह हार खरीद कर छोटी रानी को उपहार में दे दो।'
गंपू सकते में आ गया।ओर बोला ;- 'अरे ऐसा कैसे हो सकता है? उसकी कीमत तो एक लाख रुपए है।'
रौनक बोला ;- 'कहा था ना उस दिन जब तुम पहली बार आए थे कि एक रुपए की अकल से तुम एक लाख रुपए बचा सकते हो।'
इधर गंपू को हार खरीद कर भेंट करना पड़ा, उधर अकल की दुकान चल निकली। कंजूस महाजन सिर पीटकर रह गया।

कंजूस मित्र ,Short Stories For Class 3

कंजूस मित्र श्याम सुंदर नाम का एक नवयुवक शहर में रहता था और एक कंपनी में नौकरी करता था । उसके गाँव केे मित्र जब काम के सिलसिले में शहर आते तो उसके घर जरूर आते ।एक बार मनोहर लाल नाम का एक मित्र उसके घर आया ।मित्र को देखकर श्याम भौहें सिकोड़ने लगा । 
यह सब देखकर उसकी पत्नी ने कारण पूछा। उसने अपनी पत्नी को कहा कि यह मेरा मित्र बहुत ही कंजूस है , जब भी आता मुझसे खूब खर्चे करवाता है ।किन्तु अपने जेब से एक फूटी कौड़ी कभी नहीं निकालता । यह सुनकर उसकी पत्नी ने कहा कि आप फिक्र न करें ,मैं आपको एक उपाय बताती हूँ ।
      अब श्याम सुंदर अपने कंजूस मित्र को लेकर शहर भ्रमण के लिए निकल गया । वह मित्र उसकी कंजूसी से तंग आ चुका था । इस बार उस मित्र ने उसे सबक सिखाने का सोचा । वह अपने कंजूस मित्र को बाजार ले गया और कहा आपको जो भी खाने की इच्छा है बता सकते हैं , मैं आपके लिए ले दूंगा ।
  वो एक होटल में गए श्याम ने होटल मालिक से पूछा – भोजन कैसा है ? होटल के मालिक ने जवाब दिया मिठाई की तरह स्वादिष्ट है महाशय । मित्र ने कहा तो चलो मिठाई ही लेते हैं । दोनों मिठाई की दुकान पर गए , मित्र ने पूछा – मिठाइयां कैसी है ? मिठाई बेचने वाले ने जवाब दिया – मधु (शहद ) की तरह मीठी है ।
 श्याम ने कहा तो चलो मधु ही ले लेते हैं । श्याम कंजूस मित्र को शहद बेचने वाले के पास ले गया । उसने शहद बेचने वाले से पूछा – शहद कैसा है ? शहद बेचने वाले ने जवाब दिया – जल की तरह शुद्ध  है ।
    तब श्याम ने मनोहर से कहा – मैं तुम्हें सबसे शुद्ध भोजन दूंगा । उसने कंजूस मित्र को भोजन के स्थान पर पानी से भरे हुए अनेक घड़े प्रदान किए । कंजूस मित्र को अपनी गलती का अहसास हो गया , वह समझ गया कि यह सब उसे सबक सिखाने के लिए किया जा रहा है । 
उसने हाथ जोड़कर श्याम से माफी मांगी , श्याम ने भी उसे अपनी बाहों में भर लिया । दोनों हँसी – खुशी वापस घर आए । श्याम की पत्नी ने मनोहर के लिए स्वादिष्ट भोजन तैयार किया । भोजन उपरांत वह वापस गांव लौट आया ।
इसके बाद उसने अपनी कंजूसी की आदत हमेशा के लिए छोड़ दी ।

आखिर एक स्त्री चाहती क्या है ? Moral Stories In Hindi For Class 3


आखिर एक स्त्री चाहती क्या है ?विगत सवा सौ सालों में मनोविज्ञान भी इस प्रश्न का उत्तर नही दे सका—आखिर एक स्त्री चाहती क्या है ?—ओशो ने एक छोटी-सी कहानी के माध्यम से हंसाते हुए समझा दिया--
“पुराने समय की बात है। एक विद्वान को फांसी लगनी थी।
राजा ने कहाः बताओ कि आखिर औरत चाहती क्या है? जान बख्श देंगे, यदि सही उत्तर मिल जाये।
विद्वान ने कहाः हुजूर, मोहलत मिले तो पता कर के बता सकता हूँ।
एक साल की मोहलत मिल गई। बहुत घूमा, कहीं से भी संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। आखिर में किसी ने कहा कि दूर एक चुड़ैल रहती है, वही बता सकती है।
चुड़ैल ने कहा कि एक शर्त है। यदि तुम मुझसे शादी कर लो तो जवाब बताउंगी।
उसने सोच-विचार किया। जान बचाने के लिए शादी की सहमति दे दी।
शादी होने के बाद चुड़ैल ने कहाः चूंकि तुमने मेरी बात मान ली है, तो मैंने तुम्हें खुश करने के लिए फैसला किया है कि 12 घंटे मैं चुड़ैल और 12 घन्टे खूबसूरत परी बनके रहूंगी। अब तुम ये बताओ कि दिन में चुड़ैल रहूँ या रात को?
विद्वान वाकई में बुद्धिमान था। उसने सोचा यदि वह दिन में चुड़ैल हुई तो दिन नहीं कटेगा, रात में हुई तो रात नहीं कटेगी। अंततः वह बोलाः जब तुम्हारा दिल करे परी बन जाना, जब दिल करे चुड़ैल बन जाना।
यह बात सुनकर चुड़ैल ने प्रसन्न होकर कहाः चूंकि तुमने मुझे अपनी मर्ज़ी से जीने की छूट दी है, इसलिये मैं 24 घंटे, हमेशा ही परी बन के रहूंगी।
यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है।
स्त्री अपनी मर्जी का करना चाहती है। यदि स्त्री को अपनी मर्ज़ी का करने देंगे तो वो परी बनी रहेगी वरना चुड़ैल हो जाएगी।
यही बात पुरुष पर लागू होती है। अपनी स्वतंत्रता से जियेगा तो देवता, वरना राक्षस बन जाएगा। अतः मुद्दा स्त्री या पुरुष का नहीं है। संक्षेप में सारे जीवन का सारसूत्र है--मुक्ति में आनंद, दिव्यता, सौंदर्य है, और बंधन में है दुख, संताप, कुरूपता।"

"नेकी की राह (The way of righteousness)" Hindi Stories For class 3 Kids


"नेकी की राह (The way of righteousness)"शीत ऋतु अपने चरम पर थी । चारों ओर पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ एक सुंदर सा गाँव था । वहाँ एक छोटी लड़की रहती थी । उसे अपनी सहेली के घर जाने की इच्छा हुई । वह अपने हाथ में सिर्फ एक रोटी का टुकड़ा लेकर घर से चली , उसने सड़क के किनारे एक बूढ़े को देखा । मैं भूखा हूं ,उसने कहा मुझे कुछ खाने को दो ! लड़की ने उसे रोटी का टुकड़ा दे दिया । वृद्ध ने अपने दोनों हाथ उठाकर उसे आशीर्वाद दिया ।
थोड़ा आगे जाने पर उसे एक छोटा बच्चा मिला , बच्चे ने लड़की से प्रार्थना कि मुझे ओढ़ने के लिए कुछ दो । लड़की ने थोड़ी देर सोचने के बाद झटपट अपना साल निकालकर उसे दे दिया । थोड़ा आगे गई एक बच्चा ठंड से कांप रहा था ,लड़की को उस पर दया आ गई । उसने अपनी मफलर से बच्चे को ढक दिया । थोड़ा आगे चलने के बाद अब वह खुद सर्दी से काँपने लगी ,वह एक पेड़ के नीचे दुबक कर बैठ गई ।
अगले ही पल उसने तारों को आसमान से नीचे गिरते देखा । उसने जब गौर से देखा तो वे सोने के सिक्के थे ,उसका शरीर सुंदर कपड़े से ढक गया , उसके पैरों में जूते थे ,गले में मफलर थी । उसके सामने एक सुंदर सी टोकरी थी , जो फलों और मिठाइयों से भरी हुई थी । भगवान ने उसकी दयालुता के लिए उसे आशीर्वाद और इनाम दिया था ।
(Moral Stories In Hindi For Class 3)शिक्षा :-  जरूरतमंदो की मदद करने से आप को कभी किसी बात की कमी नही होगी ,, जितना अधिक दान, धर्म व दीन ,दुःखी लोगो की मदद करोगे उतना ही आप को ऊपर वाला ज्यादा देगा ....

पड़ोसन का बर्तन Hindi Story For Class 3 With Picture

पड़ोसन का बर्तन   एक बार एक औरत ने अपनी पड़ोसन से एक बर्तन उधार मांगा और दूसरे दिन उसने एक अन्य छोटे से बर्तन के साथ वह बर्तन वापस कर दिया । पड़ोसन को आश्चर्य हुआ उसने उससे पूछा कि , वह छोटा बर्तन कहां से आया  ? औरत ने जवाब दिया – तुम्हारे बड़े बर्तन ने छोटे बर्तन को जन्म दिया है । उस औरत ने सोचा कि उसकी पड़ोसन का दिमाग घूम गया है , उसने उसे कुछ नहीं कहा । क्योंकि वह एक और बर्तन पाकर बहुत खुश थी ।
    कुछ दिनों बाद पड़ोसन बर्तन फिर उधर मांगा । मगर इस बार उसने बर्तन अपनी पड़ोसन को वापस नहीं किया । सहेली के बर्तन वापस मांगने पर उसने कहा –  बर्तन  ! तुम्हारा बर्तन मर गया है । पड़ोसन ने हंसकर उससे पूछा कि बर्तन कैसे मर सकता है ? इस पर उस औरत ने बड़ी चतुराई से कहा – अगर तुम्हारा बर्तन , दूसरे बर्तन को जन्म दे सकता है तो , मर भी सकता है । यह सुनकर पड़ोसन दंग रह गई । मगर अब उस पड़ोसन के पास बर्तन को खो देने के अलावा कोई दूसरा चुनाव नहीं था ।
(Moral Stories In Hindi For Class 3) शिक्षा :- अनेकों बार हम छोटे से लाभ के लिए अपने आप को मुसीबतों में डाल लेते हैं । अतः हमें तात्कालिक लाभ नहीं देखते हुए किसी विषय पर विस्तार पूर्वक सोचना चाहिए, कि क्या गलत है और क्या सही या ।

 पिंजरे का बंदर Stories For Class 3

 पिंजरे का बंदरएक समय की बात है एक शरीफ आदमी था । उसके पास एक बंदर था ,वह बंदर के जरिए अपनी आजीविका कमाता था । बंदर कई तरह के करतब लोगों को दिखाता था । लोग उस पर पैसे फेंकते थे , जिसे बंदर इकट्ठा करके अपने मालिक को दे देता था । एक दिन मालिक बंदर को चिड़ियाघर लेकर गया ,बंदर ने वहां पिंजरे में एक और बंदर देखा । लोग उसे देख – देख कर खुश हो रहे थे तथा उसे खाने को फल बिस्किट इत्यादि दे रहे थे । बंदर ने सोचा कि पिंजरे में रहकर भी यह बंदर कितना भाग्यवान है, बिना किसी परिश्रम के ही इसे खाना-पीना मिल जाता है ।
उस रात वह बंदर भी भाग कर चिड़ियाघर में रहने पहुंच गया , उसे मुफ्त का खाना और आराम बहुत अच्छा लगा । पर कुछ दिनों में ही बंदर का मन भर गया । उसे अपनी स्वतंत्रता की याद आने लगी, अपनी  आजादी वापस चाहता था । वह फिर चिड़ियाघर से भाग कर अपने मालिक के पास पहुंच गया ।
उसे मालूम हो गया की रोटी कमाना कठिन होता है , किंतु  आश्रित होकर पिंजरे में कैद रहना उससे भी कठिन है ।(Moral Stories In Hindi For Class 3)शिक्षा :- अपने पौरुष से ही मनुष्य की महानता है ,मुफ्त की चीजें लोगों को निक्कमी बना देती है । 

एक बिल्ली स्वर्ग में In Hindi Stories For Class 3

एक बिल्ली स्वर्ग में           एक समय की बात है कि , मृत्यु के पश्चात एक बिल्ली स्वर्ग में पहुंची । ईश्वर ने उसका स्वागत किया और कहा तुम कोई एक इच्छा कर सकती हो ,जो मैं पूरी करूंगा । बिल्ली ने कहा वह एक आरामदायक पलंग चाहती है , जहां कोई तंग ना करें ।
          ईश्वर ने उसकी प्राथना स्वीकार की , कुछ दिनों पश्चात  कुछ चूहे मर गए वे भी स्वर्ग पहुंची । ईश्वर ने उन्हें भी एक वरदान मांगने को कहा । चूहोे ने पहिए वाली जूतों की मांग की जिससे वे भी स्वर्ग में तेज गति से इधर – उधर घूम सके । ईश्वर ने उनकी इच्छा पूरी की । कुछ दिनों पश्चात ईश्वर ने बिल्ली से पूछा – तुम्हें स्वर्ग में कैसा लग रहा है ? बिल्ली ने उत्तर दिया – बहुत अच्छा सबसे अच्छी लगी आप की पहियों पर भोजन व्यवस्था ।

कहानी ” एकता का बल ” In Hindi Moral Stories For Class 3


कहानी ” एकता का बल ”जिसे पढ़कर आपको बहुत ही आनंद आएगा ।एक जंगल में एक चूहा और एक कबूतर रहता था , दोनों बहुत अच्छे मित्र थे । कबूतर और चूहे की दोस्ती को देखकर किसी को भी समझ नहीं आता था कि , एक  जमीन के अंदर रहता है और दूसरा पेड़ के ऊपर । फिर भी इन दोनों में इतनी गहरी दोस्ती कैसे है  । 
यह देख कर एक दिन एक कौवा उनके पास जाता है , और कहता है कि , आप लोग मुझे भी अपना दोस्त बना लो ।मैं आप लोगों को बहुत पसंद करता हूं , और मैं आपके सहयोग के लिए हमेशा तैयार रहूंगा ।
        यह बात सुनकर चूहे ने कहा कि कौवा और चूहे की  दुश्मनी तो आदि – अनादि काल से चली आ रही है । भला चूहे की दोस्ती कौंवे से कैसे हो सकती है । कौवा, चूहे का जानी दुश्मन होता है , हम तुम पर कैसे विश्वास कर ले । यह बात सुनकर कौवा गिड़गिड़ाने लगा कि अगर तुम लोगों ने मुझे अपना दोस्त नहीं बनाया तो मैं , बिना कुछ खाए पीए ही अपने प्राण त्याग दूंगा ।
कौवे के बहुत मनाने और बार बार विश्वास दिलाने पर कबूतर ने कहा कि चलो एक बार हम इसका विश्वास कर लेते हैं , और इसे अपना दोस्त बना लेते हैं । इस तरह कौवा , कबूतर और चूहा तीनों दोस्त बन गए । दिन यूं ही बीतते गए और उन्होंने देखा कि कौवा एक बहुत अच्छा दोस्त है , और हमेशा उनकी मदद के लिए तैयार रहता है , कौवा सच्चा था , वह अपने दोस्तों को बेइंतहा प्यार करता था , तीनों दोस्त एक साथ मजे से रहते थे तथा सुख दुख में एक – दूसरे का साथ देते थे । 
कुछ समय पश्चात उस जगह पर भयानक अकाल पड़ा नदी – नाले सूखने लगे , पेड़-पौधे , घास सभी सूखने लगे ,और जंगल में खाने की बहुत किल्लत हो गई ।          कौवे ने कहा कि दोस्तों अब यहां पर रहना उचित नहीं है , यहां पर रहेंगे तो भूख से मर जाएंगे । यहां से बहुत दूर दूसरा जंगल है , जहां पर मेरा एक दोस्त है और वहां का जंगल हरा-भरा है , वहां पर खाने की खूब सारी चीजें हैं , हम लोगों को वहां पर जाना चाहिए । 
वहां पर हमारी मदद के लिए मेरा दोस्त हमेशा तैयार रहता है,  पहले तो कबूतर और चूहे को यह उपाय अच्छा नहीं लगा लेकिन बाद में सोच कर उन्होंने कौवे की बात मान ली और तीनों जंगल के लिए रवाना हो गए । कौवा चूहे को अपने चोंच में दबा कर उड़ने लगा और साथ में कबूतर भी उड़ने लगा । 
वे लोग बड़ी सावधानी से आगे बढ़ने लगे , दूसरे जंगल में पहुंचने के बाद उन्होंने देखा कि यह जंगल तो वाकई बहुत हरा-भरा है , और यहां खाने का भंडार है । कौवा एक तालाब के किनारे उतर गया और चूहे को भी नीचे उतार दिया । कबूतर भी कौवा के पास आकर उतर गया , फिर कौवे ने अपने दोस्त को जोर – जोर से आवाज लगाई ।
           तालाब से निकल कर उनके पास एक बड़ा सा कछुवा आया और उसने कौवे से कहा –  मेरे दोस्त तुम कितने दिन बाद आए हो , कहो तुम कैसे हो ? सब कुशल मंगल तो है ना ? तो कौवे ने सारी बात अपने दोस्त को बता दी । चारों दोस्त उस नदी के किनारे हंसी –  खुशी रहने लगे । कुछ दिन बाद जब यह चारों तालाब के किनारे बैठ कर बातें कर रहे थे , तभी एक हिरण भागते – भागते उनके पास आया , हिरण  हाँफ रहा था , उसकी साँसे फुली हुई  थी । 
कौंवे ने कहा ओ भाई हिरन कहां  चले जा रहे हो तुम इतना डर क्यों रहे हो ? तब हिरन ने कहा क्या तुम कुछ जानते हो बहुत बड़ी कठिनाई आने वाली है । यहां पर कुछ दूर नदी के किनारे एक राजा ने अपना डेरा लगाया है , इस राजा के सैनिक बहुत ही क्रूर और अत्याचारी है । कल वे इधर हि शिकार के लिए आयेंगे । उनके सामने जो भी आता है , उन्हें वो नष्ट कर देते हैं ।
अगर अपनी जान बचाना चाहते हो तो तुरंत यहां से भाग जाओ ! क्योंकि वे लोग कल सुबह ही शिकार के लिए निकल जायेंगे , हमारे पास समय बहुत कम है। यह बात सुनकर सभी परेशान हो गए और चारों  दोस्तों ने हिरण के साथ कही दूर चले जाने का निश्चय किया ।
      अब पांचों जानवर दौड़ते-दौड़ते दूसरी जगह पर जाने लगे चूंकि कछुवा बहुत बड़ा था और वह जमीन पर रेंगता है , इसलिए सभी धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगे । कुछ दूर जाने के बाद एक शिकारी की नजर उस कछुवे पर पड़ गई , शिकारी दौड़ते हुए उसके पास आया । हिरन भाग गई कौवा और कबूतर पेड़ पर चढ़ गयें , चूहा बिल में घुस गया । 
लेकिन कछुवा कुछ ना कर पाया और उसे शिकारी ने पकड़ लिया और अपनी जाल में भरकर चलने लगा । यह देख कर सभी दोस्त बहुत परेशान हो गए और सोचने लगे कि कैसे इस संकट से छुटकारा पाया जाए और अपने दोस्त की जान बचा जाये ।उन्होंने एक तरकीब निकाली ।
        जैसे ही नदी के किनारे शिकारी ने जाल को नीचे रखा और खुद हाथ मुंह धोने के लिए नदी के नीचे उतरा वहीं पर कुछ दूर हिरन जमीन पर लेट गई और मरने का नाटक करने लगी । इतने में कौवा आया और हिरण पर चोंच मारने लगा । यह देख कर शिकारी ने सोचा कि यह हिरन अभी-अभी मरी होगी , उसका माँस अभी ताजा होगा । 
उसने उसे उठाने के नियत से उसके पास गया तभी बिल से चूहा बाहर आया और उसने कछुवे के जाल को काट दिया । कछुवा जल्दी से निकलकर तुरंत ही नदी में कूद गया और उसकी गहराइयों में गायब हो गया । चूहा बिल में घुस गया हिरन के नजदीक आते ही कौवा उड़ गया और हिरण भी तेज दौड़ लगाते हुए जंगलों में छिप गई । इस तरह सभी साथियों ने हिम्मत और बहादुरी के साथ काम करके , एकता से रहकर उन्होंने सबकी जान बचा ली। सभी साथी फिर से एक बार अपने गंतव्य के लिए निकल पड़े।
(Moral Stories In Hindi For Class 3)शिक्षा :- अगर एकता के साथ काम किया जाए तो बड़ी से बड़ी कठिनाई भी आसानी से हल हो जाती है ।

सेठ जी की युक्ति Moral Stories In Hindi For Class 3

एक छोटे से कस्बे में एक सेठ रहता था । उसका एक बड़ा सा दुकान था , दिनभर दुकान के सामने सामान लेने वालों की कतार लगी रहती थी । इसलिए सेठ ने दो नौकर काम के लिए रख लिए । दोनों नौकर सुबह-सुबह ही दुकान आ जाते थे और देर रात तक दुकान में काम करते थे । 
सेठ दोनों नौकरों को बराबर मजदूरी देता था और सेठानी घर जाने के समय नौकरों को उनके बच्चों के लिए खाने – पीने का सामान दे देती थी । इस तरह कई दिन बीत गए सेठ को अपने दुकान की चीजें कम होती नजर आ रही थी , लेकिन दुकान के गल्ले में पैसा इतनी तेजी से नहीं बढ़ रहा था ।
अब वे परेशान होने लगे उन्होंने यह बात अपनी पत्नी को बताई तो उसकी पत्नी ने भी कहा कि मुझे भी कुछ दिनों से यही महसूस हो रहा है , कि घर का सामान जल्दी-जल्दी खत्म हो रहा है । सेठ और सेठानी ने मामले की तहकीकात करने का निश्चय किया । सेठ और सेठानी एक-एक करके नौकरों के घर गए और उन्होंने उनके घरों की छानबीन की उन्हें एक नौकर के घर से दुकान के कुछ सामान दिखाई दिए । 
सेठानी ने सेठ को कहा कि उस नौकर को दुकान से निकाल दे , तो फिर सेठ सोचने लगे कि उस नौकर के छोटे-छोटे बच्चे हैं , उनका पालन पोषण कैसे होगा ? फिर अगर वह दूसरी जगह काम पर जाता है तो वह वहां भी चोरी करेगा ! उसको निकालने से काम नहीं बनेगा उसको कैसे सुधारा जाए और कैसे सच्चाई की राह पर लाया जाए इसके बारे में सोचना पड़ेगा ।
सेठ ने दोनों नौकरों की मजदूरी बढ़ा दी , उनके बच्चों के लिए कपड़ा जूता और पढ़ाई लिखाई का खर्च भी दिया । तब सेठानी फिर से झगड़ा करने लगी कि , अपना सारा पैसा नौकर-चाकर पर लुटा दोगे तो , हमारे बच्चे क्या करेंगे , उनका भविष्य का क्या होगा , वह तो मर जाएंगे । तो उसने कहा कि नहीं सेठानी वह दोनों मेरे दुकान पर बड़ी मेहनत कर रहे हैं , उनके घर में अगर तंगी होगी तो उनका काम में मन नहीं लगेगा और भी गलत रास्ते पर चले जाएंगे उनको सुधारना मुझे बहुत जरूरी है , उनके सुधरने से हमें भी फायदा होगा । सेठ को अपने कार्य पर पूरा विश्वास था ।
धीरे – धीरे दुकान में चोरी होना बंद हो गया और दोनों नौकर जी जान से , खुशी – खुशी काम करने लगे जिससे सेठ की आमदनी में भी बढ़ोत्तरी हुई ।
(Moral Stories In Hindi For Class 3) शिक्षा : -- सेठ ने केवल अपने बारे में सोचा होता तो वह नौकर शायद कभी नहीं सुधरता , लेकिन सेठ जी की इस युक्ति से सभी का जीवन सुधर गया । हर अपराधी को दंड देकर ही नहीं सुधारा जाता बल्कि क्षमा और प्रेम से भी सुधारा जा सकता है ।
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