Top 5 Short Moral Stories in Hindi with Pictures - thekahaniyahindi

Top 5 Short Moral Stories in Hindi with Pictures | short moral stories in hindi for class 1


Short Moral Stories in Hindi with Pictures :- Here I'm sharing the Top 5 Short Moral Stories in Hindi with Pictures For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your Kids to understand the people & world that's why I'm sharing with you.

Top 5 Short Moral Stories in Hindi with Pictures :- हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? आपका फिर हाजिर हैं, Best 5 New Short Moral Stories in Hindi के साथ। दोस्तों अगर आप Google पर अगर Short Moral Stories in Hindi with Pictures सर्च कर रहे हैं तो आप बिलकुल सही जगह आये हो।

Short Moral Stories in Hindi with Pictures में  बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

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Top 5 Short Moral Stories in Hindi with Pictures | short moral stories in hindi for class 1


  1. परमात्मा का कार्य
  2. (कर्म का शाश्र्वत सिद्धांत)
  3. गाय और तेंदुआ
  4. एक पुरानी कथा जो आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है
  5. प्रेम का रिश्ता 


परमात्मा का कार्य, Short Moral Stories in Hindi for class 7

एक औरत रोटी बनाते बनाते मंत्र जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही...। 

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परमात्मा का कार्य, Short Moral Stories in Hindi for class 7


एकाएक धड़ाम से जोरों की आवाज हुई और साथ मे दर्दनाक चीख। कलेजा धक से रह गया जब आंगन में दौड़ कर झांकी तो आठ साल का चुन्नू चित्त पड़ा था,  खुन से लथपथ। मन हुआ दहाड़ मार कर रोये। परंतु घर मे उसके अलावा कोई था नही, रोकर भी किसे बुलाती, फिर चुन्नू को संभालना भी तो था। दौड़ कर  नीचे गई तो देखा चुन्नू आधी बेहोशी में माँ माँ की रट लगाए हुए है। 

अंदर की ममता ने आंखों से निकल कर अपनी मौजूदगी का अहसास करवाया। फिर 10 दिन पहले करवाये अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बावजूद ना जाने कहाँ से इतनी शक्ति आ गयी कि चुन्नू को गोद मे उठा कर पड़ोस के नर्सिंग होम की ओर दौड़ी। रास्ते भर भगवान को जी भर कर कोसती रही, बड़बड़ाती रही, हे प्रभु क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा, जो मेरे ही बच्चे को..।

खैर डॉक्टर साहब मिल गए और समय पर इलाज होने पर चुन्नू बिल्कुल ठीक हो गया। चोटें गहरी नही थी, ऊपरी थीं तो कोई खास परेशानी नही हुई।...

रात को घर पर जब सब टीवी देख रहे थे तब उस औरत का मन बेचैन था। भगवान से विरक्ति होने लगी थी। एक मां की ममता प्रभुसत्ता को चुनौती दे रही थी।

उसके दिमाग मे दिन की सारी घटना चलचित्र की तरह चलने लगी। कैसे चुन्नू आंगन में गिरा की एकाएक उसकी आत्मा सिहर उठी, कल ही तो पुराने चापाकल का पाइप का टुकड़ा आंगन से हटवाया है, ठीक उसी जगह था जहां चिंटू गिरा पड़ा था। अगर कल मिस्त्री न आया होता तो..? 

उसका हाथ अब अपने पेट की तरफ गया जहां टांके अभी हरे ही थे, ऑपरेशन के। आश्चर्य हुआ कि उसने 20-22 किलो के चुन्नू को उठाया कैसे, कैसे वो आधा किलोमीटर तक दौड़ती चली गयी? फूल सा हल्का लग रहा था चुन्नू। वैसे तो वो कपड़ों की बाल्टी तक छत पर नही ले जा पाती।

फिर उसे ख्याल आया कि डॉक्टर साहब तो 2 बजे तक ही रहते हैं और जब वो पहुंची तो साढ़े 3 बज रहे थे, उसके जाते ही तुरंत इलाज हुआ, मानो किसी ने उन्हें रोक रखा था।

उसका सर प्रभु चरणों मे श्रद्धा से झुक गया। अब वो सारा खेल समझ चुकी थी। मन ही मन प्रभु से अपने शब्दों के लिए क्षमा मांगी।

भगवान कहते हैं, "मैं तुम्हारे आने वाले संकट रोक नहीं सकता, लेकिन तुम्हे इतनी शक्ति दे सकता हूँ कि तुम आसानी से उन्हें पार कर सको, तुम्हारी राह आसान कर सकता हूँ। बस धर्म के मार्ग पर चलते रहो।"

उस औरत ने घर के मंदिर में झांक कर देखा, लगा भगवान मुस्करा रहे थे।

 (कर्म का शाश्र्वत सिद्धांत), Short Moral Stories in Hindi for class 8

महाभारत युद्ध समाप्त हुआ और भगवान श्रीकृष्ण द्वारिकापुरी वापस लौटे..।
पटरानी रुक्षमणी उनके निकट आईं और कहा…


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(कर्म का शाश्र्वत सिद्धांत), Short Moral Stories in Hindi for class 8

'हे कृष्ण! मेरे मन में एक बात खटक रही है, जो आपको बता कर उसका समाधान करना चाहती हूं।'
श्रीकृष्ण के संकेत पर उन्होंने पुछा
'महादानी कर्ण का ऐसा अंत क्यों??' 
'एक श्रेष्ठ मित्र, महापराक्रमी और महादानेश्वर, ऐसा क्या दोष था उसका??'
'जिसने स्वयं की माता कुंती को भी अर्जुन के सिवा किसी अन्य पांडव को नहीं मारने का वचन दिया था।'
'अपने कवच और कुंडल जानते बूझते भी ब्राह्मण वेशधारी इंद्र को दान में दे दिए थे..
ऐसे महान दानदाता ने अपने किस कर्म का फल भोगा??'

तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनके प्रश्न में निहित उनकी शंका के समाधान हेतु बताया कि…
'हे महारानी! महाभारत युद्ध में जब सात सात महारथियों के सामने अकेले युद्ध करता महावीर अभिमन्यु… युद्ध भूमि में धराशाई हो गया था….
और 
अपनी आसन्न मृत्यु के द्वार पर खड़ा था...तब उसने युद्ध भूमि में अपने समीप खड़े कर्ण से अपनी क्षुधा पूर्ति हेतु जल की याचना इस विश्वास से की थी कि☝️☝️
 यद्यपि वह शत्रु पक्ष का है तथापि महादानेश्वर होने के कारण, वह कर्ण उसकी क्षुधा को शांत करने हेतु जल अवश्य देगा।☝️
किंतु,
अपने स्वयं के पास मीठा पेयजल होने के बाद भी,
मात्र इसलिए कि ऐसा करने से उसका प्रिय मित्र दुर्योधन रुष्ट हो जाएगा, 
कर्ण ने उस मृत्यु द्वार पर खड़े याचक की याचना की अवहेलना की थी और …
युद्ध भूमि में उस बालक को अपने सूखे कंठ लिए प्राण त्यागना पड़ा।

हे रुक्षमणी।☝️

कर्ण के इस एकमात्र पाप ने उसके संपूर्ण जीवन में किए दानों से अर्जित पुण्यों को नष्ट कर दिया, यह एकमात्र कारण प्रर्याप्त था, उसके पुण्यों की यशस्वी गाथा का क्षय करने हेतु।☝️
और…
काल की गति देखिए ☝️

उसी जल के स्रोत से उत्पन्न किचड़ में …
कर्ण के रथ का पहिया धंस जाता है और…
उस महारथी, महादानी और महापराक्रमी कर्ण के अंत का... उसकी मृत्यु का कारण बन जाता है।

यही है 'कर्मफल'..☝️

-( कर्म का शाश्वत 'सिद्धांत' )

'किसी के साथ किए अन्याय का एक ही पल...

आपके संपूर्ण जीवन की प्रामाणिकता को शून्य करने हेतु प्रर्याप्त है।।'

 ध्यान दें ☝️
'हम में से प्रत्येक को अपने किए कर्मों का फल यहीं इसी जीवन में, इसी पृथ्वी पर भोगना है।'

'किसी की भावना और विश्वास को तोड़ना सबसे बड़ा पाप है, विशेषकर ऐसे व्यक्ति का जिसने आप पर आंख मूंद कर विश्वास किया है।'

मित्रों, नि: संकोच इसे अपनी इच्छा अनुसार पुनः प्रसारित करें, इस संदेश को।

धन्यवाद।

गाय और तेंदुआ, Short Moral Stories in Hindi for class 6,

बड़ोदरा के एक गांव में लाक डाउन लगने के बाद से ही हर रोज रात में ये तेंदुआ इस गाय से मिलने आता है और घंटों ऐसे ही बैठा रहता है मानो वो किसी अपने से मिल रहा हो 

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गाय और तेंदुआ, Short Moral Stories in Hindi for class 6,
रोज रोज कुछ देर के लिए गांव के कुत्तों का डरकर भौंकने और रात भर के लिए गांव के बाहर भाग जाने से गांव वालों ने सीसीटीवी कैमरा लगवाया तो ये नजारा दिखा 

चूंकि तेंदुआ गांव के किसी जानवर को नुक्सान नहीं पहुंचाता है और दो-तीन घंटे गाय के पास बैठने के बाद चला जाता है इसलिए गांव वालों ने इस बात का पता लगाना शुरू कर दिया कि गाय और तेंदुए की इस अजीब प्रेम के पीछे क्या रहस्य है 

इस रहस्य से पर्दा उठाया गाय के पुराने मालिक ने 

उसने बताया कि 2010 में जब ये तेंदुआ छोटा था और इस गाय ने पहले बछिया को जन्म दिया था तब इस तेंदुए की मां को शिकारियों ने मार दिया था तब ये तेंदुआ सिर्फ अपनी माँ का दूध ही पीता था इसे मिलाकर कुल तीन नन्हे तेंदुए और थे। 

लेकिन माँ के मारे जाने से दूध के अभाव से इसके साथ के दो नन्हे तेंदुए मर गए थे इसलिए वन विभाग वाले उस नन्हे तेंदुए को उसी गाय के पास लाते थे जहां वो उनके सामने ही दुध निकालकर तेंदुए के नन्हे बच्चे को पिलाते था और फिर उस समय उस नन्हे अनाथ तेंदूए के बच्चे को गाय खूब दुलारती थी 

फिर जब तेंदुआ बड़ा हो गया तो इसने दूध पीना बंद कर दिया फिर कुछ ही दिनों में वन विभाग वालों ने इसे जंगल की और छोड़ दिया था और ये गाय भी जिसकी थी उसने बेच दी थी

अभी भी तेदुए को लगता है कि ये गाय उसकी मां है और ये बहुत दिनों से इसको खोज रहा था ,अब जाकर ये उसको मिली है उस तेंदुए को उस गाय में अपनी माँ दिखती है इसीलिए ये उससे मिलने चला आता है।

और अभी तक ये तेंदुआ किसी गाय बछिया या बछड़े को देखता है तो चुपचाप अपना रास्ता बदल लेता है और कभी हमला नही करता...जानवर हिंसक जरूर है लेकिन दूध का कर्ज और अपना फर्ज दोनो याद है 

एक पुरानी कथा जो आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है, Short Moral Stories in Hindi for class 3

एक राजा को राज करते काफी समय हो गया था।बाल भी सफ़ेद होने लगे थे।एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया। उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया।

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एक पुरानी कथा जो आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है, Short Moral Stories in Hindi for class 3
राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दी, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे भी उसे पुरस्कृत कर सकें। सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई, नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे।

तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक "दोहा " पढ़ा :-
...
"घणी गई थोड़ी रही, या में पल पल जाय।
 एक पलक के कारणे, युं ना कलंक लगाय।। "
...
अब इस "दोहे " का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला।
तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा।
...
जब यह दोहा "गुरु जी " ने सुना तो गुरुजी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दी।
...
दोहा सुनते ही "राजकुमारी " ने  भी अपना नौलखा हार नर्तकी को भेंट कर दिया।
...
दोहा सुनते ही राजा के " युवराज " ने भी अपना  मुकुट उतारकर नर्तकी को समर्पित कर दिया ।

राजा बहुत ही अचम्भित हो गया...
सोचने लगा रात भर से नृत्य चल रहा है पर यह क्या ! अचानक "एक दोहे" से सब  अपनी मूल्यवान वस्तु बहुत ही ख़ुश हो कर नर्तकी को समर्पित कर रहें हैं ?

 राजा सिंहासन से उठा और नर्तकी को बोला ;- "एक दोहे " द्वारा एक सामान्य नर्तकी  होकर तुमने सबको लूट लिया।
...
जब यह बात राजा के गुरु ने सुनी तो गुरु के नेत्रों में आँसू आ गए
और गुरुजी कहने लगे ;- "राजा ! इसको सामान्य नर्तकी  मत कह, ये अब मेरी गुरु बन गयी है क्योंकि इसके दोहे ने मेरी आँखें खोल दी हैं।

दोहे से यह कह रही है कि ....  " मैं सारी उम्र जंगलों में भक्ति करता रहा और आखिरी समय में नर्तकी का मुज़रा देखकर अपनी साधना नष्ट करने यहाँ चला आया हूँ, "
 भाई ! मैं तो चला ।" यह कहकर गुरुजी तो अपना कमण्डल उठाकर जंगल की ओर चल पड़े।
...
राजा की लड़की ने कहा ;- "पिता जी ! मैं जवान हो गयी हूँ। आप आँखें बन्द किए बैठे हैं, मेरा विवाह नहीं कर रहे थे। आज रात मैं आपके महावत के साथ भागकर अपना जीवन बर्बाद करने वाली थी।

लेकिन इस नर्तकी के दोहे ने मुझे सुमति दी ... "कि जल्दबाज़ी न कर, हो सकता है तेरा विवाह कल हो जाए, क्यों अपने पिता को कलंकित करने पर तुली है ?"
...
युवराज ने कहा ;- महाराज ! आप वृद्ध हो चले हैं, फिर भी मुझे राज नहीं दे रहे थे। मैं आज रात ही आपके सिपाहियों से मिलकर आपको मारने वाला था।

लेकिन इस दोहे ने समझाया कि पगले ... आज नहीं तो कल आखिर राज तो तुम्हें ही मिलना है, क्यों अपने पिता के खून का कलंक अपने सिर पर लेता है! थोड़ा धैर्य रख।"*
...
जब ये सब बातें राजा ने सुनी तो राजा को भी आत्म ज्ञान हो गया । राजा के मन में वैराग्य आ गया। राजा ने तुरन्त फैंसला लिया - "क्यों न मैं अभी युवराज का राजतिलक कर दूँ।" फिर क्या था, उसी समय राजा ने युवराज का राजतिलक किया और अपनी पुत्री को कहा - "पुत्री ! 

दरबार में एक से एक राजकुमार आये हुए हैं। तुम अपनी इच्छा से किसी भी राजकुमार के गले में वरमाला डालकर पति रुप में चुन सकती हो।" राजकुमारी ने ऐसा ही किया और राजा सब त्याग कर जंगल में गुरु की शरण में चला गया ।
...
यह सब देखकर नर्तकी ने सोचा ;- "मेरे एक दोहे से इतने लोग सुधर गए, लेकिन मैं क्यूँ नहीं सुधर पायी ?" उसी समय नर्तकी में भी वैराग्य आ गया । उसने उसी समय निर्णय लिया कि आज से मैं अपना नृत्य बन्द करती हूँ
"हे प्रभु ! मेरे पापों से मुझे क्षमा करना। बस, आज से मैं सिर्फ तेरा नाम सुमिरन करुँगी ।"

"ये पुरानी कथा जो आज भी बिल्कुल प्रसांगिक है"

lock down भी खुल चुका है, बस ! 
 आज हम इस दोहे को कोरोना (covid-19) को लेकर अपनी समीक्षा करके देखे तो हमने पिछले 22 तारीख से जो संयम बरता, परेशानियां झेली ऐसा न हो कि अंतिम क्षण में एक छोटी सी भूल, हमारी लापरवाही, हमारे साथ पूरे समाज को न ले बैठे।

आओ हम सब मिलकर कोरोना से संघर्ष करें।
*घणी गई थोड़ी रही, या में पल पल जाय।*
*एक पलक रे कारणे, युं ना कलंक लगाय।"*

*घर पर रहें सुरक्षित रहें व सावधानियों का विशेष ध्यान रखें।*

प्रेम का रिश्ता (love relationship), Short Moral Stories in Hindi for class 9

एक बार तीन वृद्ध पुरूषों ने एक घर के बाहर रात में आसरा लिया। एक महिला अपने घर से बाहर निकली उसने तीनों वृद्ध लोगों को देखा । महिला ने कहा मैं आप लोगों को जानती तो नहीं किंतु मैं सोचती हूं कि आप भूखे हैं !

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प्रेम का रिश्ता (love relationship), Short Moral Stories in Hindi for class 9
कृपया अंदर आए और कुछ खा ले । वृद्धों ने कहा हम तीनों साथ – साथ कभी किसी घर में नहीं जाते । महिला ने जानना चाहा ऐसा क्यों  ? एक वृद्ध ने समझाया मेरा नाम प्रेम है , दूसरे का नाम सफलता और तीसरे का नाम संपत्ति है । उसने आगे कहा अब आप अपने परिवार के लोगों से पूछ ले कि हम में से आप किसे अंदर बुलाना चाहेंगे ।

        महिला ने अंदर जाकर अपने पति से बात कि उसने कहा – हम सब संपत्ति को बुलाते हैं ;

उसकी पत्नी ने असहमति जाहिर की तथा कहा – क्यों ना हम सफलता को बुलाएं  ?

अंत में उनकी बेटी ने सलाह दी क्या प्रेम को बुलाना ज्यादा उचित नहीं होगा ?

दोनों ने ही अपनी बेटी की इच्छा का मान रखते हुए हामी भर दी ।

       उन्होंने प्रेम कौन है ? कहकर पुकारते हुए , उसे अंदर आने का आग्रह किया । जैसे ही प्रेम ने घर में प्रवेश किया संपत्ति और सफलता भी उसके पीछे – पीछे घर में आ गए ।  प्रेम ने मुस्कुराते हुए परिवार को कारण समझाया कि जहां प्रेम होता है , वहां सफलता और संपत्ति भी अपने आप आ जाते हैं । परंतु यदि आप संपत्ति या सफलता को बुलाते तो मैं उनके पीछे नहीं आता ।

"जिनके परिवार में प्रेम, और शान्ति होती हैं , उन्हें सफलता और संपत्ति जरूर प्राप्त होता है "

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धन्यवाद 

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